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Health Tips: सर्दियों में ये छोटी गलतियां ट्रिगर कर सकती हैं अस्थमा, लापरवाही पड़ सकती है भारी

Thu, 04 Dec 2025 06:40 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Winter Asthma Triggers: सर्दियों में अस्थमा अटैक का जोखिम अधिक हो जाता है। इसके पीछे कई कारण होते हैं, लेकिन अगर कुछ सावधानियां बरती जाएं तो इस गंभीर खतरों को टाला जा सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
Cold Weather Asthma Care: सर्दियों का मौसम अस्थमा के मरीजों के लिए अक्सर एक बड़ी चुनौती लेकर आता है। इस मौसम में अस्थमा के अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसका मुख्य कारण ठंडी और रूखी हवा है, जो सांस की नलियों को सिकोड़ देती है और उनमें सूजन पैदा करती है। मगर इसके साथ ही हमारी दैनिक दिनचर्या की कुछ छोटी-छोटी लापरवाहियां और गलतियां भी अस्थमा को ट्रिगर करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। 

अस्थमा के मरीजों में सांस की नली पहले से ही संवेदनशील होती है। ऐसे में किसी भी ट्रिगर का हल्का सा संपर्क भी गंभीर प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है। इस समस्या को गंभीरता से लेना इसलिए जरूरी है, क्योंकि अनियंत्रित अस्थमा फेफड़ों को स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकता है। इन खतरनाक आदतों को पहचानना और उन्हें तुरंत सुधारना सर्दियों में अस्थमा को नियंत्रण में रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
प्रदूषण और संक्रमण से बचाव में लापरवाही
सर्दियों में वायु प्रदूषण अस्थमा का सबसे बड़ा ट्रिगर है। वातावरण के अधिक एक्यूआई में बिना मास्क के घूमना या घर के अंदर धूपबत्ती, अगरबत्ती या मच्छर कॉइल जलाना फेफड़ों में सीधे सूजन पैदा करता है। इसके अलावा वायरल संक्रमण (जैसे सर्दी, फ्लू) भी अस्थमा को बिगाड़ते हैं। लापरवाही से बचाव न करने पर संक्रमण अस्थमा को ट्रिगर कर देता है।

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सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
अचानक ठंडा या गर्म हवा का संपर्क
अचानक तापमान में बदलाव (जैसे गर्म कमरे से सीधे ठंडी हवा में बाहर निकलना) सांस की नलियों को संकुचित कर देता है, जिससे अस्थमा का अटैक आ सकता है। दूसरा बहुत गर्म पानी से नहा कर और तुरंत ठंडी हवा में आना भी नसों पर दबाव डालता है। ध्यान रखें कि ठंड में बाहर निकलते समय मुंह और नाक को स्कार्फ या मास्क से ढकना जरूरी है।

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अस्थमा की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Freepik
इन्हेलर और दवा के सेवन में अनियमितता
दवाओं के सेवन में लापरवाही करना सबसे गंभीर गलती है। अक्सर ऐसा होता है कि अस्थमा के मरीज जब अच्छा महसूस कर रहे होते हैं तो नियमित रूप से निवारक इन्हेलर का उपयोग करना छोड़ देते हैं। नियमित दवा फेफड़ों की सूजन को नियंत्रित रखती है। दवा को छोड़ देने पर फेफड़ों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है और ठंड या प्रदूषण का हल्का ट्रिगर भी गंभीर अटैक को जन्म दे सकता है।
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सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
पानी की कमी
सर्दियों में पानी कम पीने से डिहाइड्रेशन होता है, जिससे सांस की नली में जमा बलगम और कफ गाढ़ा हो जाता है। यह गाढ़ा बलगम नलियों को जाम कर सकता है। रोजाना नियमित शारीरिक गतिविधि (जैसे घर के अंदर योग या वॉक) न करने से फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है। घर के अंदर हल्का व्यायाम करने से फेफड़े स्वस्थ बने रहते हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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