Weather Change Alert: अगर आप या आपके घर में कोई अस्थमा का शिकार है, तो आपको ये लेख आखिर तक अवश्य पढ़ना चाहिए. क्योंकि बदलते मौसम में आपको खास ध्यान रखने की जरूरत है।
विज्ञापन
1 of 7
घर में है अस्थमा का मरीज तो मौसम बदलने पर जरूर अपनाएं ये सावधानियां
- फोटो : AI
Weather Change Alert: अस्थमा एक ऐसी सांस संबंधी बीमारी है, जो बदलते मौसम में अधिक परेशान कर सकती है। खासकर मानसून, सर्दी या मौसम में अचानक बदलाव होने पर अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी, सीने में जकड़न और घरघराहट जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हवा में बढ़ी नमी, धूल, फंगस, परागकण और प्रदूषण अस्थमा अटैक का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
ऐसे में अगर आपके घर में कोई अस्थमा का मरीज है या आप खुद इस बीमारी से जूझ रहे हैं, तो कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं बदलते मौसम में अस्थमा के मरीजों को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे स्वस्थ रहें और सांस लेने में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
विज्ञापन
2 of 7
घर में है अस्थमा का मरीज तो मौसम बदलने पर जरूर अपनाएं ये सावधानियां
1. इनहेलर हमेशा अपने साथ रखें
अस्थमा के मरीजों के लिए इनहेलर सबसे जरूरी दवाओं में से एक होता है। डॉक्टर द्वारा बताया गया रेस्क्यू इनहेलर अचानक सांस फूलने या अस्थमा अटैक के समय तुरंत राहत देने में मदद करता है, जबकि कंट्रोलर इनहेलर बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। घर से बाहर निकलते समय इनहेलर हमेशा अपने बैग या जेब में रखें और समय-समय पर इसकी एक्सपायरी डेट भी जांचते रहें। डॉक्टर की सलाह के बिना इनहेलर का इस्तेमाल बंद न करें।
विज्ञापन
3 of 7
घर में है अस्थमा का मरीज तो मौसम बदलने पर जरूर अपनाएं ये सावधानियां
- फोटो : Adobe stock
2. धूल, धुएं और प्रदूषण से बचें
धूल, धुआं, वाहन से निकलने वाला प्रदूषण, सिगरेट का धुआं, अगरबत्ती, तेज परफ्यूम और केमिकल की गंध अस्थमा के सामान्य ट्रिगर्स हैं। इनके संपर्क में आने से सांस की नलियों में सूजन बढ़ सकती है और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता का मास्क पहनें और प्रदूषण अधिक होने पर अनावश्यक रूप से बाहर जाने से बचें। घर में भी धूम्रपान बिल्कुल न होने दें।
4 of 7
घर में है अस्थमा का मरीज तो मौसम बदलने पर जरूर अपनाएं ये सावधानियां
- फोटो : AI
3. नमी और फंगस से बचाव करें
बरसात के मौसम में घरों में नमी बढ़ने से दीवारों, बाथरूम, किचन और खिड़कियों के आसपास फंगस और फफूंद तेजी से विकसित हो सकती है। इनके सूक्ष्म कण हवा में मिलकर सांस के जरिए शरीर में पहुंचते हैं, जिससे अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। घर को हवादार रखें, नमी वाली जगहों की नियमित सफाई करें और जरूरत पड़ने पर एग्जॉस्ट फैन या डीह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।
विज्ञापन
5 of 7
घर में है अस्थमा का मरीज तो मौसम बदलने पर जरूर अपनाएं ये सावधानियां
- फोटो : Adobe stock
4. घर की नियमित सफाई करें
घर में जमा धूल, कारपेट, पर्दे, तकिए, गद्दे और बेडशीट में डस्ट माइट्स और एलर्जी पैदा करने वाले कण जमा हो सकते हैं। ये अस्थमा अटैक का कारण बन सकते हैं। इसलिए घर की नियमित सफाई करें, वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें और चादर, तकिए के कवर तथा पर्दों को समय-समय पर गर्म पानी से धोएं। कमरे में धूल जमा न होने दें और पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें।
विज्ञापन
6 of 7
घर में है अस्थमा का मरीज तो मौसम बदलने पर जरूर अपनाएं ये सावधानियां
- फोटो : AI
5. पौष्टिक आहार लें
संतुलित और पौष्टिक भोजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। विटामिन C, विटामिन D, ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। अपनी डाइट में मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे, दालें और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करें। तला-भुना और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
घर में है अस्थमा का मरीज तो मौसम बदलने पर जरूर अपनाएं ये सावधानियां
- फोटो : Freepik.com
6. संक्रमण से बचाव करें
वायरल संक्रमण, फ्लू, सर्दी-जुकाम और अन्य श्वसन संक्रमण अस्थमा के लक्षणों को गंभीर बना सकते हैं। इसलिए नियमित रूप से हाथ धोएं, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें और बीमार लोगों के संपर्क से बचें। यदि डॉक्टर सलाह दें तो फ्लू या अन्य जरूरी टीके समय पर लगवाएं। संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें, ताकि अस्थमा की स्थिति बिगड़ने से पहले इलाज शुरू किया जा सके।
-----------------------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।