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Asha Bhosle Death: क्यों होता है सीने में संक्रमण, आशा भोसले थीं शिकार; ऑर्गन फेलियर का बढ़ जाता है खतरा

Sun, 12 Apr 2026 08:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मशहूर गायिका आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया।  उन्हें अत्यधिक थकान और सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉ ने बताया कि मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उनका निधन हुआ।
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आशा भोसले का निधन - फोटो : Amarujala.com
मशहूर गायिका आशा भोसले (92) का रविवार (12 अप्रैल) को निधन हो गया। एक दिन पहले शनिवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ है, हालांकि बाद में पोती जनाई भोसले ने ट्वीट कर बताया कि उन्हें अत्यधिक थकान और सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने जानकारी दी है कि, आशा भोसले ने आज ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उनका निधन हुआ।
 

अब सवाल ये है कि सीने में संक्रमण की समस्या क्या है? ये दिक्कत होती क्यों है और किस तरह से ये जानलेवा तक साबित हो सकती है? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।


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सीने में संक्रमण की समस्या - फोटो : Freepik.com
सीने में संक्रमण के बारे में जानिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, उम्र बढ़ने के साथ सीने के इन्फेक्शन की समस्या आम हो जाती है। वैसे तो ये संक्रमण अक्सर हल्के होते हैं और दवाओं के साथ आराम करने से ठीक हो जाते हैं। पर कुछ स्थितियों में संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग पहले से ही कोमोरबिडिटी का शिकार रहे हैं, उनमें संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक होता है। ये जानलेवा तक हो सकती है।

सीने का संक्रमण ऐसी समस्या है जो फेफड़ों या सांस की नलियों को प्रभावित करती है। यह अक्सर किसी वायरस या बैक्टीरिया के कारण होता है। ब्रोंकाइटिस और निमोनिया सीने में संक्रमण के सबसे आम प्रकार हैं। 
 
  • ब्रोंकाइटिस सांस की बड़ी नलियों को प्रभावित करता है। इसमें आमतौर पर बलगम के साथ लगातार खांसी की दिक्कत बनी रहती है। यह अक्सर वायरल संक्रमण के कारण होता है।
  • वहीं निमोनिया फेफड़ों में सांस की छोटी नलियों और हवा की थैलियों में होने वाला एक संक्रमण है। यह अधिक गंभीर होता है और अक्सर इसके लिए डॉक्टरी इलाज की जरूरत पड़ती है। बुजुर्गों में निमोनिया का खतरा अधिक रहता है, इसपर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये जानलेवा तक हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं,  सीने का संक्रमण सामान्य सर्दी या फ्लू के बाद भी हो सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है, ताकि जल्द से जल्द इलाज शुरू किया जा सके और किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके।
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सीने में संक्रमण के कारण क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Adobe Stock
चेस्ट इंफेक्शन होने की पहचान क्या है?

सीने में संक्रमण के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के या सामान्य सर्दी-खांसी जैसे होते हैं, जिसका पता लगाना आमतौर पर कठिन होता है। हालांकि कुछ दिक्कतें अगर लगातार बनी हुई हैं तो सावधान हो जाना चाहिए। जल्द से जल्द डॉक्टरी सलाह और दवा शुरू करना जरूरी हो जाता है।
 
  • खांसी जो ठीक न हो रही हो। खांसी के साथ बलगम भी आ रहा हो।
  • सांस फूलना या सांस लेने में दिक्कत होना
  • सीने में दर्द या जकड़न महसूस होना, खासकर खांसते या सांस लेते समय।
  • तेज बुखार, कंपकंपी या बहुत ज्यादा ठंड लगना।
  • बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी महसूस होना।
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फेफड़ों में संक्रमण को न लें हल्के में - फोटो : Freepik.com
बुजुर्गों में क्यों होता है ज्यादा खतरा ?

डॉक्टर बताते हैं, सीने का इन्फेक्शन वैसे तो किसी को भी हो सकता है, लेकिन बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है और गंभीर भी हो सकती है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कम होती जाती है। कोमोरबिडिटी जैसी स्थितियों में तो संक्रमण ठीक होने में और भी ज्यादा समय लग सकता है। बुजुर्गों में चेस्ट इंफेक्शन के मुख्य कारणों को जान लीजिए। 
 
  • उम्र बढ़ने के साथ इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिससे इन्फेक्शन से लड़ना मुश्किल हो जाता है।
  • क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), हार्ट की समस्या या डायबिटीज जैसी बीमारियां सीने में संक्रमण के खतरे और गंभीरता को बढ़ा सकती हैं।
  • उम्र बढ़ने के साथ शारीर के कम सक्रिय रहने से फेफड़ों के काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
  • पोषण और पानी की कमी के कारण छाती से संबंधित दिक्कतों का खतरा और भी बढ़ जाता है।


ऑर्गन फेलियर का हो सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बुजुर्गों में सीने का संक्रमण अगर बढ़ जाए तो इससे ऑर्गन फेलियर तक का खतरा हो सकता है। संक्रमण बढ़ने की स्थिति में बैक्टीरिया फेफड़ों से खून में भी प्रवेश कर जाते हैं। इससे संक्रमण के अन्य अंगों में फैलने का भी खतरा बढ़ जाता है। समय रहते अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो इससे कई अंगों के काम करना बंद करने (ऑर्गन फेलियर) का खतरा भी बढ़ जाता है, जो मौत का भी कारण बन सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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