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Artificial Sweetener: चीनी जगह आर्टिफिशियल स्वीटनर का करते हैं इस्तेमाल? जानिए ये सेहत के लिए ठीक है या नहीं

Sun, 20 Apr 2025 11:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आर्टिफिशियल स्वीटनर (कृत्रिम मिठास वाली चीज) को खाद्य पदार्थों में उनकी चीनी की मात्रा कम करने  और उनके स्वाद को बेहतर बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। हालांकि बढ़ते शोध से पता चलता है कि इस तरह के स्वीटनर भी सेहत के लिए अच्छे हों ये जरूरी नहीं है। 
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आर्टिफिशियल स्वीटनर का करते हैं इस्तेमाल? - फोटो : Freepik.com
आर्टिफिशियल स्वीटनर शब्द इन दिनों काफी चर्चा में है। इसे चीनी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है।

कई अध्ययन इस बात पर जोर देते हैं कि शरीर के लिए जिन चीजों के सेवन की आदत सबसे नुकसानदायक हो सकती है, चीनी उनमें से एक है। चीनी हाई कैलोरी वाली होती है जिससे वजन बढ़ने, मेटाबॉलिज्म, मेंटल हेल्थ सहित कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है। यही कारण कि सभी लोगों को इसका सेवन कम से कम करने की सलाह दी जाती है। चीनी के एक विकल्प के रूप में आर्टिफिशियल स्वीटनर का दुनियाभर में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

अब सवाल उठता है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर हमारी सेहत के लिए ठीक हैं या नहीं? क्या इसे चीनी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करना ठीक है?
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आर्टिफिशियल स्वीटनर कैसे काम करती हैं? - फोटो : Freepik.com
आर्टिफिशियल स्वीटनर किस तरह से काम करते हैं?

आर्टिफिशियल स्वीटनर (कृत्रिम मिठास) को खाद्य पदार्थों में उनकी चीनी की मात्रा कम करने और स्वाद को बेहतर बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। हालांकि बढ़ते शोध से पता चलता है कि इस तरह के स्वीटनर भी सेहत के लिए अच्छे हों ये जरूरी नहीं है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आर्टिफिशियल स्वीटनर मुख्य रूप से रसायनों के रूप में विकसित किए गए थे जो हमारे जीभ पर मौजूद स्वीट टेस्ट सेंस को उत्तेजित करते हैं। ये दिमाग को एक सिग्नल भेजते हैं जिससे शरीर को लगता है कि आपने हाई कार्बोहाइड्रेट वाली चीज खाई है। इस सिग्नल के जवाब में हमारा शरीर इसे उर्जा के रूप में ब्रेक डाउन करने लगता है।

इस शोध के दौरान हाइपोथैलेमस में रक्त प्रवाह को मापा गया, जो हमारे मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो भूख नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है। विशेषज्ञों ने पाया कि सुक्रोज वाली चीजें खाने से मस्तिष्क का ये क्षेत्र एक्टिव हो जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर भी उन  न्यूरॉन्स को उत्तेजित करता है जो भूख को बढ़ा देते हैं। समय के साथ, इससे हमारी भूख बढ़ती जाती है- जिसका अर्थ है कि हम अधिक खाने लगते हैं और इससे वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है। 
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वजन बढ़ने का खतरा - फोटो : Freepik.com
बढ़ सकता है मोटापे का खतरा

शोधकर्ताओं ने पाया कि आर्टिफिशियल स्वीटनर का सेवन करने से भी हमें अधिक भूख लगती है, जो अंततः हमें अधिक कैलोरी का सेवन करने के लिए प्रेरित कर सकती है। 

अध्ययन में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से अधिक मात्रा में इस तरह के स्वीटनर का सेवन करते हैं, उनमें मोटापे की आशंका उन लोगों की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत अधिक होती है, जो कम मात्रा में इसका इस्तेमाल करते हैं। 
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आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल ठीक है या नहीं? - फोटो : Freepik.com
आर्टिफिशियल स्वीटनर स्वस्थ विकल्प हैं या नहीं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आर्टिफिशियल स्वीटनर के इस्तेमाल के पीछे की वजह चीनी और इसके साइड-इफेक्ट्स को कम करना है, पर जिस तरह के अध्ययन के रिपोर्ट हैं उससे पता चलता है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर को भी स्वस्थ विकल्प नहीं माना जा सकता है।

आर्टिफिशियल स्वीटनर का स्वास्थ्य पर कई प्रकार से नकारात्मक प्रभाव हो सकता है, लेकिन क्या ये हमारे लिए चीनी जितना ही हानिकारक हैं? विशेषज्ञ कहते हैं, चीनी की तुलना में इसे थोड़ा बेहतर माना जा सकता है पर हमें और विस्तृत शोध की आवश्यकता है। फिलहाल चीनी को अधिक नुकसानदायक माना जाता है।



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स्रोत और संदर्भ
Non-caloric sweetener effects on brain appetite regulation in individuals across varying body weights


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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