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Arthritis: 20 से कम उम्र के लोग भी हो रहे गठिया का शिकार, आपका भी यूरिक एसिड हाई तो नहीं? बरतें ये सावधानियां

Tue, 25 Feb 2025 07:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गठिया से बचाव के लिए स्वस्थ दिनचर्या अपनाना, वजन नियंत्रित रखना, संतुलित आहार लेना, सिगरेट-शराब से परहेज करना, पर्याप्त मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थ का सेवन करना और नियमित रूप से कसरत करना बेहद मददगार साबित हो सकता है।
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हड्डियों की बीमारी - फोटो : Freepik.com
गठिया की समस्या कुछ दशकों पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी बनी हुई थी, हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार होते जा रहे हैं। गठिया जिसे आर्थराइटिस भी कहा जाता है, इसके कारण जोड़ों में सूजन, दर्द, अकड़न की दिक्कत होने लगती है। यह शरीर के किसी भी जोड़ को प्रभावित कर सकता है, लेकिन हाथों, घुटनों, कूल्हों और पैरों में इसका जोखिम सबसे आम है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,आर्थराइटिस की दिक्कत किसी को भी हो सकती है। बुजुर्गों में तो इसकी दिक्कत होती है है, 20 से कम आयु के लोग यहां तक कि बच्चे भी अब इसकी चपेट में आ रहे हैं।  

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जैविक, हार्मोनल और जीवनशैली संबंधी कारण गठिया के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। जिन लोगों का यूरिक एसिड अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उनमें भी इस बीमारी का खतरा हो सकता है। 
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हड्डियों की समस्या - फोटो : Freepik.com
गठिया को समझना जरूरी

गठिया ‘क्रिस्टल आर्थ्रोपेथी’ समूह का एक रोग है, जो जोड़ों और मुलायम ऊतकों में ‘क्रिस्टल’ जमने के कारण होता है। गठिया तब विकसित होता है, जब खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है और यह जोड़ों में पहुंचकर सुई-नुमा ‘क्रिस्टल’ का रूप ले लेता है, जिससे दर्द और सूजन की दिक्कत बढ़ जाती है।

गठिया के शिकार मरीज अक्सर इसे गंभीर दर्द के रूप में वर्णित करते हैं। यह आमतौर पर पैर के अंगूठे से शुरू होता है और इसमें त्वचा पर हल्का-सा स्पर्श भी अक्सर असहनीय लगता है।
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हड्डियों में दर्द और इससे संबंधित खतरा - फोटो : Freepik.com
गठिया की समस्या और इसके लक्षण

गठिया का निदान असहनीय दर्द, प्रभावित जोड़ों में और उनके आसपास सूजन तथा लालिमा जैसे आम लक्षणों पर आधारित है। सूजे हुए जोड़ से लिए गए तरल पदार्थ की माइक्रोस्कोप से जांच किए जाने के दौरान ‘क्रिस्टल’ दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा, रक्त परीक्षण में आमतौर पर यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा हुआ मिलता है।

गठिया से बचाव के लिए स्वस्थ दिनचर्या अपनाना, वजन नियंत्रित रखना, संतुलित आहार लेना, सिगरेट-शराब से परहेज करना, पर्याप्त मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थ का सेवन करना और नियमित रूप से कसरत करना बेहद मददगार साबित हो सकता है।

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यूरिक एसिड बढ़ने के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
यूरिक एसिड बढ़ने की वजह

यूरिक एसिड का स्तर आमतौर पर शराब के अत्यधिक सेवन, मोटापे, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के कारण बढ़ता है। प्यूरीन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन को भी यूरिक एसिड के स्तर में वृद्धि के लिए जिम्मेदार माना जाता है। प्यूरीन उन यौगिकों को कहते हैं, जिनमें यूरिक एसिड पाया जाता है। इससे युक्त खाद्य पदार्थों में मांस, कलेजी, मैकेरल और एंकोवी जैसी तैलीय मछलियां तथा मार्माइट और बीयर जैसे खमीरयुक्त पदार्थ शामिल हैं।

जिन लोगों में यूरिक एसिड का स्तर अधिक बढ़ा रहता है, उनमें गठिया बढ़ने का खतरा अधिक हो सकता है। 
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जोड़ों का दर्द और आर्थराइटिस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
इलाज में कारगर दवाएं उपलब्ध

खानपान में बदलाव मात्र से गठिया के लक्षणों से राहत पाना संभव नहीं है। दवाओं के जरिए गठिया के दर्द को उभरने और बीमारी को अधिक गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। जोड़ों में सूजन होने पर आबुप्रोफेन, नेप्रोक्सन या स्टेरॉयड जैसी सूजन-रोधी दवाएं दी जाती हैं। सूजन खत्म होने के बाद भविष्य में गठिया के दर्द और सूजन को उभरने से रोकना महत्वपूर्ण है। अगर आपको कम उम्र से ही अक्सर घुटनों में दर्द-सूजन की दिकक्त बनी रहती है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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