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Health Alert: युवाओं में बढ़ता आर्थराइटिस का खतरा, कहीं धूम्रपान तो नहीं है इसका कारण?

Mon, 13 Oct 2025 08:22 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • धूम्रपान की आदत के कारण शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जिससे जोड़ों की सूजन और प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी होती है। इससे जोड़ों के कार्टिलेज धीरे-धीरे खराब लगते हैं जिसके कारण दर्द और अकड़न बढ़ जाती है।
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धूम्रपान - फोटो : Freepik.com
कुछ दशकों पहले तक ये माना जा रहा था कि जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं। हालांकि मौजूदा समय में स्थिति काफी बदल चुकी है। 

हड्डियों-जोड़ों में दर्द और कमजोरी की समस्या अब कम उम्र के लोगों में भी बढ़ती जा रही है। 25-35 वर्ष के युवाओं में घुटनों, कंधों और हाथों के जोड़ों में दर्द, अकड़न और सूजन जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लाइफस्टाइल, खानपान की कमी, शारीरिक निष्क्रियता इसका प्रमुख कारण हैं।

जब भी बात गठिया की होती है तो सबसे पहले हमारे दिमाग में शारीरिक निष्क्रियता, व्यायाम की कमी, विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी जैसी स्थितियां आती हैं। पर क्या आप जानते हैं कि धूम्रपान करने की आदत भी आपके लिए दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है? 
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युवाओं में बढ़ता आर्थराइटिस का खतरा - फोटो : Adobe Stock
युवाओं में आर्थराइटिस का खतरा
 
रुमेटाइड आर्थराइटिस और कुछ प्रकार के ऑस्टियोआर्थराइटिस के आनुवंशिक जोखिम कारक होते हैं, लेकिन केवल जीन ही किसी भी बीमारी का कारण नहीं बनते। आनुवंशिक प्रवृत्ति होने पर भी लक्षणों को ट्रिगर करने के लिए कई स्थितियां जैसे चोट, संक्रमण और जीवनशैली के कारकों की आवश्यकता होती है।

धूम्रपान भी ऐसी ही एक स्थिति है जिसे कई अध्ययनों में युवाओं में गठिया के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार बताया गया है। शोध बताते हैं कि जो लोग अक्सर धूम्रपान करते हैं, उनमें रूमेटाइड आर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा 2 से 3 गुना ज्यादा होता है।
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धूम्रपान के नुकसान - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान से आर्थराइटिस का खतरा

शोधकर्ता बताते हैं,  धूम्रपान की आदत के कारण शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जिससे जोड़ों की सूजन और प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी होती है। इससे जोड़ों के कार्टिलेज धीरे-धीरे खराब लगते हैं जिसके कारण दर्द और अकड़न बढ़ जाती है।

जर्नल ऑफ रूमेटोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों में आर्थराइटिस का खतरा लगभग 60% तक बढ़ जाता है। धूम्रपान शरीर में सी-रिएक्टिव प्रोटीन और इंटरल्यूकिन-6 जैसे इंफ्लेमेटरी मार्कर को बढ़ाता है, जो सूजन और दर्द का कारण बनते हैं।

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तंबाकू-धूम्रपान से बचाव करें - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान से क्या दिक्कतें होती हैं?

सिगरेट में निकोटिन होती है। लंबे समय तक धूम्रपान के कारण निकोटीन हड्डियों की रक्त के संचार और बोन डेंसिटी को कम करता है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।

एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि धूम्रपान न करने वाले लोगों की तुलना में धूम्रपान करने वाले पुरुषों में आरए का जोखिम दोगुना और महिलाओं में 1.3 गुना अधिक था। अन्य शोध में पाया गया कि धूम्रपान की अवधि और सिगरेट की संख्या के साथ जोखिम बढ़ता जाता है। इतना ही नहीं सिगरेट उन लोगों में भी आरए विकसित करने का कारण बन सकती है जिनमें आनुवंशिक जोखिम नहीं है।
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आर्थराइटिस से कैसे बचें? - फोटो : Freepik.com
आर्थराइटिस के खतरे को कैसे कम करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जिस तरह से कम उम्र के लोगों में हड्डियों से संबंधित दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 

आर्थराइटिस के खतरे को कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि आप धूम्रपान और तंबाकू का सेवन बंद करें। इसके अलावा रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि या योग करें। आहार में कैल्शियम, विटामिन डी और प्रोटीन से भरपूर चीजें जैसे दूध, दही, अंडे, मछली और हरी सब्जियां शामिल करें। अधिक वजन के कारण भी गठिया का खतरा हो सकता है इसलिए शरीर के वजन को नियंत्रित रखें, ताकि जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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