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Archana Puran Singh: क्या है सीआरपीएस, जिसका शिकार हो गई हैं अर्चना पूरन सिंह? जिंदगी को बना देती है मुश्किल

Mon, 12 Jan 2026 07:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • एक्ट्रेस अर्चना पूरन सिंह को कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम नामक समस्या हो गई है, हाल ही में बेटे आयुष्मान सेठी ने इसकी जानकारी दी है। आइए जानते हैं कि आखिर ये समस्या होती क्या है?
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अर्चना पूरन सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम@archanapuransingh
मशहूर अभिनेत्री और टीवी जज अर्चना पूरन सिंह इन दिनों एक गंभीर और दर्दनाक बीमारी से जूझ रही हैं। बेटे आयुष्मान ने हाल ही में एक पोस्ट में बताया कि उनकी मां एक दुर्लभ स्वास्थ्य समस्या का शिकार हैं। उन्हें कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम (सीआरपीएस) की दिक्कत है।

अपनी मां के बारे में बात करते हुए आयुष्मान ने कहा, उनके लिए साल 2025 सबसे मुश्किल रहा है। उनका हाथ टूट गया था और उन्हें सीआरपीएस नाम की एक दुर्लभ बीमारी हो गई, जिसका मतलब है कि उनका हाथ अब कभी पहले जैसा नहीं हो पाएगा। 
 


अब लोगों के मन में सवाल है कि आखिर कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम क्या है जिसे इतना खतरनाक माना जाता है?
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कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम की समस्या - फोटो : Adobe Stock
कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम के बारे में जानिए?

कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम (सीआरपीएस) एक तरह के क्रॉनिक दर्द की समस्या है जो आमतौर पर हाथ या पैर को प्रभावित करता है। ये दिक्कत अक्सर किसी चोट, सर्जरी, स्ट्रोक या हार्ट अटैक के बाद होती है। 

विशेषज्ञों के अनुसार सीआरपीएस आपके सेंट्रल या पेरिफेरल नर्वस सिस्टम में खराबी के कारण होता है। आपका सेंट्रल नर्वस सिस्टम (जिसमें आपका दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड शामिल हैं) आपके दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड से आपके अंगों, हाथों, पैरों, उंगलियों और पैर की उंगलियों तक संदेश या सिग्नल पहुंचाता है। ऐसे में इसमें होने वाली गड़बड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।

विशेषज्ञ अभी तक इस समस्या को पूरी तरह से समझ नहीं पाए हैं।
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सीआरपीएस के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
इसमें किस तरह की दिक्कतें होती हैं?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सीआरपीएस के लक्षण समय के साथ बदल सकते हैं और हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि दर्द, सूजन, लालिमा और अत्यधिक संवेदनशीलता (खासकर ठंड और छूने पर) इसमें सबसे आम हैं। समय के साथ, प्रभावित अंग ठंडा और पीला पड़ सकता है। इसमें त्वचा और नाखूनों में बदलाव के साथ-साथ मांसपेशियों में ऐंठन और कसाव भी हो सकता है। एक बार जब ये बदलाव हो जाते हैं, तो यह स्थिति अक्सर ठीक नहीं हो पाती।
  • हाथ-पैर में जलन या तेज दर्द की समस्या।
  • छूने या ठंड के प्रति संवेदनशीलता
  • दर्द वाली जगह पर सूजन
  • त्वचा के तापमान में बदलाव जैसे कभी पसीना आना और कभी ठंडा होना
  • त्वचा का सफेद और धब्बेदार से लेकर लाल या नीला होना
  • जोड़ों में जकड़न या सूजन और नुकसान
  • मांसपेशियों में ऐंठन, कंपन और कमजोरी (एट्रोफी)
  • शरीर के प्रभावित हिस्से को हिलाने की क्षमता में कमी
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सीआरपीसी हो सकती है गंभीर - फोटो : Adobe stock
क्या है इसका इलाज और बचाव का तरीका

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर किसी को ये दिक्कत हो गई है तो शुरुआत में ही इलाज शुरू करना जरूरी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये दिक्कत समय के साथ कई जटिलताएं बढ़ा देती है। इसके अलावा, इलाज न होने पर दर्द आमतौर पर बढ़ता जाता है जिससे हाथ या पैर जैसे प्रभावित अंगों को हिलाना-डुलाना भी मुश्किल हो जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर किसी को गंभीर चोट लगी है तो कुछ सावधानियां बरतकर आप सीआरपीएस की समस्या से बच सकते हैं।
 
  • अगर हाथ या कलाई टूट गई है तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन-सी सप्लीमेंट्स लें। अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग कलाई टूटने के बाद विटामिन-सी की डोज लेते हैं, उनमें सीआरपीएस होने का खतरा उन लोगों की तुलना में कम होता है जिन्होंने विटामिन सी नहीं लिया।
  • कुछ रिसर्च से पता चलता है कि जो लोग स्ट्रोक के बाद जल्दी चलना-फिरना शुरू कर देते हैं उनमें भी सीआरपीएस होने का खतरा कम हो जाता है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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