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असमंजस: कोरोना 'पॉजिटिव' मरीजों की 'निगेटिव' रिपोर्ट आ रही, इलाज में देरी से हो सकता है जान का संकट

Sat, 10 Oct 2020 12:05 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
देश और दुनिया में बढ़ती जा रहे कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण करने के लिए सबसे प्राथमिक चुनौती, इसकी जांच करना है। कोरोना वायरस की जांच के लिए दुनियाभर में तमाम तरह के जांच किट बनाए और विकसित किए जा चुके हैं। बहुत सारी तकनीकों ने कम समय और कम खर्च में कोरोना जांच का दावा किया। लेकिन देश में सबसे ज्यादा दो जांच प्रक्रिया अपनाई जा रही है- एंटीजन टेस्ट और आरटीपीसीआर टेस्ट। देश में कोरोना जांच की जो रफ्तार बढ़ी है, उसमें एंटीजन किट का अहम रोल रहा है। आरटीपीसीआर टेस्ट की अपेक्षा एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट कम समय में आ जाती है, लेकिन इसकी रिपोर्ट की एक्यूरेसी यानी सटीकता उतनी नहीं है। ढेरों पॉजिटिव मामलों की रिपोर्ट एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आई हैं। आरटीपीसीआर टेस्ट के बावजूद ऐसे मामले सामने आए हैं। ...तो आखिर इन नतीजों पर कितना भरोसा किया जा सकता है?
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Coronavirus Antigen Test - फोटो : Social Media
देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें कोरोना संक्रमण के बावजूद मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। कोरोना के लक्षण दिखने पर जो लोग एंटीजन टेस्ट करा रहे हैं, उनमें से कइयों की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है। एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद लोग जब आरटीपीसीआर टेस्ट करा रहे हैं तो उनमें से कइयों की रिपोर्ट पॉजिटिव तो कुछ लोगों की रिपोर्ट निगेटिव ही आ रही है। यानी कि केवल एंटीजन टेस्ट ही नहीं, बल्कि आरटीपीसीआर टेस्ट भी कोरोना मरीजों की सही रिपोर्ट नहीं दे रहा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद जब संक्रमण गंभीर रूप ले रहा, तब अन्य तरह की जांच का सहारा लेना पड़ रहा है। इस दौरान लोगों के फेफड़े पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि तबतक कोरोना वायरस नुकसान पहुंचा दे रहा। गंभीर होने के बाद जब मरीज फेफड़े का एक्सरे करा रहे या फिर सीटी स्कैन करा रहे, तब जाकर कोरोना संक्रमण की बात सामने आ पा रही है। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बिहार के भागलपुर से लेकर मध्य प्रदेश के भोपाल तक ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। 

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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
पहले कुछ मामलों पर नजर डालते हैं:
केस-1
  • लखनऊ में इंदिरानगर निवासी महिला (26) ने यहां के बीएमसी में कोरोना जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई तो केजीएमयू में आरटीपीसीआर जांच कराई, रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
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जांच के लिए नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
केस-2
  • इंदिरानगर के ही सी ब्लॉक के पास रहने वाले 70 वर्षीय बुजुर्ग को बुखार चढ़ा। बीएमसी में हुए एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट न निगेटिव आई और न ही पॉजिटिव। दो दिन बाद ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा तो उन्हें केजीएमयू में भर्ती कराया। आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
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नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
केस-3
  • लखनऊ में तेलीबाग निवासी निजी कंपनी में कार्यरत एक 35 वर्षीय व्यक्ति को बुखार आया तो पहले उनका एंटीजन टेस्ट कराया गया। रिपोर्ट निगेटिव आई। मगर हालत बिगड़ने पर आरटीपीसीआर जांच कराई गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई।
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तापमान जांचती स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
न केवल लखनऊ बल्कि भागलपुर, गोरखपुर जैसे शहरों की बात करें तो पहले 70 फीसदी आरटीपीसीआर टेस्ट और 30 फीसदी एंटीजन टेस्ट होते थे। मगर अब 70 फीसदी एंटीजन टेस्ट और महज 30 फीसदी ही आरटीपीसीआर टेस्ट हो रहे हैं। कोरोना मरीजों के एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आने तक तो ठीक है, लेकिन खबरों के मुताबिक कोरोना मरीजों की आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट भी निगेटिव आने के कई मामले सामने आए हैं। 

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CT scan - फोटो : अमर उजाला
दोनों टेस्ट बेकार, सीटी स्कैन से कोरोना संक्रमण का पता चला
  • स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल में एक व्यक्ति ने दोनों जांच कराई, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आई। थकान ज्यादा महसूस होने पर दोबारा डॉक्टर के पास गए तो सीटी स्कैन में कोरोना संक्रमण का पता चला। 46 वर्षीय एक और व्यक्ति का यही अनुभव है।
  • वहीं, उम्र में 50 पार एक अन्य बुजुर्ग को लगातार कमजोरी और बदन दर्द जैसे लक्षणों के बावजूद आरटीपीसीआर टेस्ट में रिपोर्ट निगेटिव आई। उन्हें भी सीटी स्कैन से ही कोरोना संक्रमण का पता चला। 

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Coronavirus Test - फोटो : ANI
अन्य तकनीकों को भी व्यवहार में लाए जाने की जरूरत
कोरोना वायरस की जांच के लिए देश और दुनिया में कई तरह की तकनीक विकसित की गई। लेकिन व्यवहार में मुख्यत: दो ही तकनीक रही। आरटी-पीसीआर और एंटीजन टेस्ट। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना जांच के अन्य विकल्पों को भी व्यवहार में लाए जाने की जरूरत है। कम समय और कम खर्च में जांच रिपोर्ट देने वाली तकनीकों के इस्तेमाल से सटीकता का पता चलेगा और खामियों को दूर किया जा सकेगा।
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Coronavirus Test - फोटो : PIB/Pixabay
बिहार के भागलपुर स्थित ट्रिपल आईटी यानी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) के निदेशक प्रो. अरविंद चौबे ने बताया कि वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस की जांच के लिए नई तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए दो से चार सेकेंड में रिपोर्ट बता दी जाएगी। कोरोना के साथ ही यह तकनीक टीबी और निमोनिया की भी रिपोर्ट देगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल भी इसकी सराहना कर चुके हैं। लेकिन अबतक इस तकनीक का न तो पेटेंट कराया जा सका है और न ही प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। 
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