फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus Drug: कोरोना वायरस के उपचार में किन दवाओं का हो रहा इस्तेमाल, कैसे ठीक हो रहे लोग?

Sat, 10 Oct 2020 11:28 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
Coronavirus Drug - फोटो : Amar Ujala
कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उपचार के प्रोटोकॉल में संशोधन किया है। कोरोना वायरस के हल्के, मध्यम और गंभीर मामलों के लिए लगातार शोध के बाद अब बाजार में कई दवाएं उपलब्ध हो चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से लगातार जरूरी समीक्षाएं की जाती है और कोरोना महामारी के उपचार को लेकर प्रोटोकॉल जारी किया जाता रहा है। मंत्रालय ने 'कोविड-19 के लिए क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल' की समीक्षा करते हुए आपातकाल की स्थिति में प्रतिरोधक क्षमता के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा टोसीलीजुमैब, वायरसरोधी दवा रेमडेसिविर के साथ ही अन्य उपचार संबंधी अनुशंसा की थी। आइए जानते हैं कि स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रोटोकॉल के तहत देश में कोरोना मरीजों का उपचार कैसे हो रहा है, किन दवाओं से लोग ठीक हो रहे हैं: 
विज्ञापन

2 of 6
Hydroxychloroquine Tablet - फोटो : Social Media
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि बीमारी की शुरुआत में सार्थक प्रभाव के लिए मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन गंभीर मामलों में इससे बचना चाहिए। कई अध्ययनों में क्लीनिकल इस्तेमाल के दौरान हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को असरदार बताया गया है। संशोधित प्रोटोकॉल में कहा गया है कि कई बड़े अवलोकन अध्ययनों में इसका कोई प्रभाव या सार्थक क्लीनिकल परिणाम नहीं दिखा है। 
विज्ञापन

3 of 6
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन - फोटो : social media
प्रोटोकॉल में बताया गया है कि अन्य वायरसरोधी दवाओं की तरह इसका इस्तेमाल भी बीमारी के शुरुआती स्टेज में किया जाना चाहिए। इससे सार्थक परिणाम संभव है। कोरोना के शुरुआती चरण में इसके इस्तेमाल से मरीजों को आराम होगा। वहीं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए इसका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। 

4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए प्रोटोकॉल के तहत कोविड की गंभीर स्थिति और मरीज को आईसीयू की जरूरत होने की स्थिति में एजिथ्रोमाइसिन के साथ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल किए जाने की अनुशंसा की थी, जिसे समाप्त कर दिया गया है। 
विज्ञापन

5 of 6
रेमडेसिविर - फोटो : Social media
प्रोटोकॉल के मुताबिक, आपातकालीन स्थिति में रेमडेसिविर का इस्तेमाल मध्यम स्तर के ऐसे कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए किया जा सकता है जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत हो। इसका इस्तेमाल उन मरीजों के लिए नहीं किया जाना चाहिए जो गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित हों और उच्च स्तर के यकृत एंजाइम से पीड़ित हैं। मंत्रालय ने कहा है कि रेमडेसिविर का इस्तेमाल 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ ही गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी नहीं किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
रेमडेसिविर दवा - फोटो : social media
मालूम हो कि लक्षणों के आधार पर शोधों में रेमडेसिविर कोरोना मरीजों के लिए कारगर साबित हुई थी, जिसके बाद भारत समेत कई देशों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि इसका इस्तेमाल निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत ही होना चाहिए। संशोधित प्रोटोकॉल के अनुसार प्लाज्मा उपचार मध्यम तौर पर बीमार ऐसे मरीजों के लिए किया जाना चाहिए जिनमें स्टेरॉयड के इस्तेमाल के बावजूद सुधार नहीं आ रहा हो। संशोधित प्रोटोकॉल में बताया गया है कि इसकी खुराक चार से 13 एमजी प्रति किलोग्राम के बीच हो सकता है। सामान्य तौर पर 200 एमएल की एक खुराक दी जा सकती है, जो दो घंटे से कम के अंतराल पर नहीं हो।

(नोट: कोरोना मरीजों का उपचार डॉक्टर या विशेषज्ञ की निगरानी में कराया जाना चाहिए। बिना डॉक्टरी सलाह के किसी तरह की दवा लेना मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें