फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानना जरूरी: ब्लड प्रेशर-कोलेस्ट्रॉल ही नहीं इन वजहों से भी हो सकते हैं हार्ट अटैक का शिकार, हो जाइए सावधान

Mon, 10 Feb 2025 02:33 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आप जानते हैं कि  लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के अलावा भी कई स्थितियां हो सकती हैं जिसके कारण हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और भविष्य में गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है? आइए इस स्थितियों के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
हार्ट अटैक के क्या कारण हैं? - फोटो : Freepik.com
हृदय रोगों के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को इस रोग का शिकार पाया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा रहता है जिसे हृदय रोगों का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को हार्ट की समस्या रही हो उन लोगों में भी हृदय संबंधित बीमारियां हो सकती हैं जिसको लेकर सभी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

पर क्या आप जानते हैं कि लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के अलावा भी कई स्थितियां हो सकती हैं जिसके कारण हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और भविष्य में गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है? आइए इन स्थितियों के बारे में जानते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं सभी लोगों को इसपर गंभीरता से ध्यान देते रहना और बचाव के लिए उपाय करना जरूरी है। 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
हृदय की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
हृदय संबंधित रोगों का बढ़ता खतरा 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक हृदय संबंधी रोगों के कारण वैश्विक स्वास्थ्य पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हृदय रोगों के कारण होने वाली मौतों में से 60-70 फीसदी के लिए हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जिम्मेदार है। एक अन्य रिपोर्ट से पता चलता है कि डब्ल्यूएचओ के यूरोपीय क्षेत्र में हृदय रोगों के लिए हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) मुख्य कारक है। यहां किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि 30-79 वर्ष की आयु के लगभग तीन में से एक व्यक्ति को हाइपरटेंशन की दिक्कत है, जिसके कारण हार्ट अटैक होने का खतरा बढ़ जाता है।

आइए उन परिस्थितियों के बारे में जानते हैं जिनपर ध्यान न देना भी हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।
विज्ञापन

3 of 5
प्रदूषण के दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com
वायु प्रदूषण है खतरनाक

जिन पर्यावरणीय कारकों के कारण हार्ट अटैक हो सकता है उनमें वायु प्रदूषण को प्रमुख माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि वायु प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों में दिल का दौरा पड़ने की आशंका अधिक होती है। अगर आप नियमित रूप से दूषित हवा में सांस लेते हैं, अक्सर कार-वाहनों से निकलने वाले धुएं के संपर्क में रहते हैं तो इससे धमनियों के बंद होने और हृदय रोग होने की आशंका बढ़ जाती है।

प्रदूषित हवा में उपस्थित छोटे कण, जिन्हें पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) कहा जाता है वे सांस के माध्यम से फेफड़ों और हार्ट में पहुंचकर कोशिकाओं को गंभीर क्षति पहुंचाने लगते हैं जिसके कारण हार्ट अटैक होने का जोखिम बढ़ जाता है।

4 of 5
गुस्सा आने की समस्या - फोटो : Freepik.com
ज्यादा गुस्सा आता है तो हो जाइए सावधान

क्रोध, दुःख और तनाव जैसी भावनाएं भी दीर्घकालिक रूप में हृदय संबंधी समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिसको लेकर भी सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।
 
कई बार सरप्राइज पार्टी, बहुत अधिक खुशी-गम के कारण भी हृदय की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। क्रोध की स्थिति स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल में वृद्धि का कारण बनती है जिससे हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है। क्रोध की भावना परिसंचरण तंत्र के सामान्य कामकाज को बाधित कर सकती है, जिससे हृदय पर दबाव पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
अस्थमा और सांस की समस्याओं के दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com
आपको सांस की दिक्कत तो नहीं?

अगर आपको फेफड़ों की बीमारी जैसे अस्थमा-ब्रोंकाइटिस है तो इसके कारण आपमें दिल का दौरा पड़ने की आशंका लगभग 70% बढ़ जाती है। भले ही आप इसे नियंत्रित रखने के लिए इनहेलर का इस्तेमाल करते हों, फिर भी आपका जोखिम सामान्य से ज्यादा हो सकता है।

अस्थमा वायुमार्ग में दीर्घकालिक सूजन उत्पन्न करके हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा देती है। समय के साथ धमनियों में प्लाक बनने लगता है (एथेरोस्क्लेरोसिस) जो रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचाती है। सांस की समस्या के शिकार लोगों को अधिक सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।



----------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें