बॉडी डिटॉक्स पर दें ध्यान
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दूसरा मंत्र- शरीर से दूर करेगा रोगों का खतरा
आयुर्वेद कहता है "सर्वेषां रोगाणां निदानं कुपिता मला:" यानी सभी बीमारियों की जड़ कुपित मल (विषैले तत्व या टॉक्सिन्स) हैं। जब शरीर में वात, पित्त या कफ असंतुलित होकर दूषित हो जाते हैं, तब रोग उत्पन्न होते हैं। इसके लिए पंचक्रम किए जाते हैं।
पंचकर्म आयुर्वेद की एक विशेष डिटॉक्स प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालना और शरीर को संतुलित करना होता है। इसमें वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य शरीर में असंतुलित दोषों को दूर करके जमा हुए विषैले पदार्थों को बाहर निकालना और संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना है।