फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानना जरूरी: बुढ़ापे की इस बीमारी का अब तक नहीं है कोई इलाज, कम उम्र से ही शुरू कर दीजिए बचाव के उपाय

Wed, 19 Feb 2025 07:38 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अल्जाइमर रोग के कारण समय के साथ आपकी याददाश्त, सोचने-सीखने और समझने की क्षमता कम प्रभावित होने लगती है। अल्जाइमर रोग पर अगर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण  आपको डिमेंशिया रोग हो सकता है। अल्जाइमर का कोई इलाज नहीं है, इसलिए जरूरी है कि आप कम उम्र से ही बचाव के कुछ उपाय जरूर करते रहें। 
विज्ञापन
1 of 5
अल्जाइमर रोग का खतरा - फोटो : Freepik.com
उम्र बढ़ने के साथ कई प्रकार की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जाता है। 50 की उम्र के बाद मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर होने लग जाती हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और मस्तिष्क से संबंधित विकार भी बढ़ जाते हैं।

दुनियाभर में तेजी से अल्जामर रोग का जोखिम बढ़ता जा रहा है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधान करते हैं। रिपोर्ट्स बताते हैं कि 55 से अधिक उम्र के लोगों में समय के साथ अल्जाइमर रोग और इसके कारण होने वाली जटिलताओं का जोखिम 42 फीसदी तक बढ़ जाता है।

अल्जाइमर रोग के कारण समय के साथ आपकी याददाश्त, सोचने-सीखने और समझने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। इस रोग पर अगर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण आपको डिमेंशिया भी हो सकता है। चूंकि अल्जाइमर का कोई इलाज नहीं है, इसलिए जरूरी है कि आप कम उम्र से ही बचाव के कुछ उपाय जरूर करते रहें। 
विज्ञापन

2 of 5
मस्तिष्क से संबंधित बीमारी - फोटो : Freepik.com
उम्र बढ़ने के साथ अल्जाइमर रोग का खतरा

आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका में 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 70 लाख लोग अल्जाइमर रोग से पीड़ित हैं। उनमें से 70% से अधिक 75 वर्ष और उससे अधिक आयु के हैं।

अल्जाइमर रोग के शुरुआती लक्षणों में आपको हाल-फिलहाल की हुई घटनाएं और बातचीत भी याद नहीं रहती हैं। समय के साथ, ये रोग गंभीर रूप से याददाश्त की कमी और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।
विज्ञापन

3 of 5
अल्जाइमर रोग के कारण क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Freepik.com
अल्जाइमर रोग की क्या पहचान है?

अल्जाइमर रोग की शुरुआत धीरे-धीरे होती है और समय के साथ इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं। प्रारंभिक स्थिति में इसके कारण छोटी-छोटी बातें भूल जाने, नाम और स्थान याद न रहने,  निर्णय लेने में कठिनाई होने, बातचीत में दिक्कत होने, चिड़चिड़ापन और अवसाद की समस्या हो सकती है।

शोध के अनुसार, अल्जाइमर होने के कई कारण हो सकते हैं। बीटा-अमाइलॉइड प्लाक नामक प्रोटीन के असामान्य जमाव से न्यूरॉन्स क्षतिग्रस्त होते हैं इसके कारण आपको मस्तिष्क से संबंधित समस्याएं होने लग जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अल्जाइमर किसी को भी हो सकता है इसलिए कम उम्र से ही बचाव के लिए प्रयास करने चाहिए।

4 of 5
मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
लाइफस्टाइल और आहार को रखें ठीक

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अल्जाइमर का कोई इलाज नहीं है। हालांकि लाइफस्टाइल और दिनचर्या में सुधार करके आप भविष्य में इसके जोखिमों को कम कर सकते हैं।  

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक अध्ययन के अनुसार, नियमित व्यायाम और योग-मेडिटेशन जैसी मानसिक गतिविधियां अल्जाइमर के जोखिम को 30% तक कम कर सकती हैं। इसी तरह जामा न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार विटामिन-डी की कमी और अल्जाइमर के बीच गहरा संबंध पाया गया है। यानि कि स्वस्थ और पौष्टिक आहार का सेवन करके आप अल्जाइमर रोग के खतरे को कम कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ब्रेन हेल्थ के लिए ठीक रखें खानपान - फोटो : Freepik.com
बचाव के लिए क्या उपाय करें?

हार्वर्ड  मेडिकल स्कूल के विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो अल्जाइमर रोग से बचाव के लिए कोई पुख्ता तरीका नहीं है हालांकि आप कुछ उपायों का ध्यान रखकर इस रोग से बचाव कर सकते हैं। 
  • स्वस्थ आहार लें: हरी सब्जियां, फल, नट्स, ऑलिव ऑयल और मछली का सेवन करें।
  • नियमित व्यायाम करें: रोजाना 30 मिनट तक पैदल चलें, योग और ध्यान करें।
  • पर्याप्त नींद लें: रोज 7-8 घंटे की गहरी नींद मस्तिष्क के लिए जरूरी है। नींद की कमी से अल्जाइमर रोग होने का खतरा रहता है।
  • सामाजिक रूप से सक्रिय रहें: दोस्तों और परिवार के साथ समय अधिक समय बिताएं और अपनी पसंदीदा चीजें करें।
  • ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल करें: उच्च रक्तचाप और डायबिटीज को कंट्रोल रखना भी आपके लिए जरूरी है।
  • विटामिन डी और बी12 मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। आहार में इन पोषक तत्वों की मात्रा सुनिश्चित करें।


---------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें