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Covid Side-Effects: संक्रमित रहे लोगों में देखी जा रही है एलोपीसिया की समस्या, चक्कतों में झड़ रहे हैं बाल

Tue, 23 Apr 2024 09:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बालों के झड़ने की समस्या - फोटो : istock
कोरोनावायरस ने सेहत को कई तरह से प्रभावित किया है। अध्ययनों से पता चलता है कि भले हो आपमें संक्रमण के दौरान हल्के-मध्यम स्तर के लक्षण रहे हैं फिर भी इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का खतरा हो सकता है। कोरोना के कारण हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों के साथ मस्तिष्क से संबंधित कई दिक्कतें देखी जाती रही हैं।

कोरोना के दुष्प्रभावों को लेकर जामा डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि जो लोग संक्रमण का शिकार रहे हैं उनमें एलोपीसिया एरीटा नामक बीमारी का खतरा दोगुना देखा जा रहा है। इसमें सिर और दाढ़ी के बाल चकत्तों में झड़ने लग जाते हैं।

पांच लाख से अधिक दक्षिण कोरियाई लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 के बाद एलोपेसिया एरीटा के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। बालों के झड़ने की ये समस्या ऑटोइम्यून बीमारी के रूप जानी जाती है जिसका जोखिम कोविड-19 का शिकार रहे लोगों में, बिना संक्रमितों की तुलना में  82% अधिक देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही आपमें संक्रमण के दौरान हल्के स्तर के लक्षण रहे हैं फिर भी कोरोना के कारण होने वाले दुष्प्रभावों का खतरा हो सकता है।
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बालों के झड़ने की समस्या - फोटो : istock
कोविड-19 के कारण एलोपेसिया एरीटा की समस्या

शोधकर्ताओं ने कहा, एलोपेसिया एरीटा की समस्या संवेदनशील व्यक्तियों में वायरस, टीकाकरण और मनोवैज्ञानिक तनाव जैसे पर्यावरणीय कारकों के कारण हो सकता है। रिपोर्ट्स में कोविड-19 के बाद इस समस्या में वृद्धि रिपोर्ट की जा रही है। 

शिकागो स्किन क्लिनिक में त्वचा विशेषज्ञ डैनिलो डेल कैंपो ने अध्ययन के निष्कर्षों को आश्चर्यजनक बताया है। वह कहते हैं, जो कुछ भी प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करता है वह अन्य समस्याओं को भी ट्रिगर कर सकता है। एलोपेसिया एरीटा मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से उत्पन्न होता है। पहले के भी अध्ययनों में इस बात को लेकर चर्चा होती रही है कि कोरोनावायरस प्रतिरक्षा प्रणाली को असामान्य रूप से ट्रिगर करता है।
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कोरोना संक्रमण की समस्या - फोटो : istock
कोरोना का बालों की कोशिकाओं पर असर

अध्ययनकर्ताओं ने बताया, कोरोना संक्रमण से साइटोकिन्स की मात्रा बढ़ती हुई देखी गई है जिसके भी कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। साइटोकिन्स एक प्रकार के प्रोटीन होते हैं जो अन्य प्रतिरक्षा प्रणाली कोशिकाओं और रक्त कोशिकाओं की वृद्धि और गतिविधि को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण होते हैं।

इसकी अधिकता के कारण अनजाने में बालों की कोशिकाएं भी लक्षित हो जाती हैं जिससे कारण बालों के झड़ने, पैच में टूटने की समस्या हो सकती है। वैज्ञानिकों ने कहा विभिन्न आबादी के बीच कोविड-19 और एलोपीसिया के संबंधों को स्पष्ट करने के लिए आगे और अधिक अध्ययन आवश्यक हैं।

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बालों के झड़ने की समस्या - फोटो : istock
क्या है एलोपीसिया एरीटा की समस्या?

एलोपीसिया एरीटा को मुख्यरूप से ऑटोइम्यून बीमारी मानी जाती है ये तब होती है जब हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली बालों के रोम पर अटैक कर देती है। इसके कारण बालों के झड़ने का खतरा बढ़ जाता है। एलोपेसिया एरीटा आमतौर पर सिर और चेहरे को प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये आनुवांशिक विकार की स्थिति है। परिवार में पहले किसी को ये समस्या रही है तो अन्य लोगों में भी इसका जोखिम हो सकता है।

बालों की इस समस्या के कई कारणों के अलावा कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि लंबे समय से बनी रहने वाली तनाव की स्थिति से भी एलोपीसिया का खतरा हो सकता है।
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एलोपीसिया की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : istock
इन जोखिमों के बारे में जानिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर मामलों में एलोपीसिया एरीटा में छोटे-छोटे टुकड़ों में बाल झड़ने लगते हैं। कुछ स्थितियों में इसके कारण पूरी खोपड़ी के बाल जा सकते हैं। अध्ययनों के निष्कर्ष बताते हैं कि 30 साल और कम उम्र में बालों की इस समस्या का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना संक्रमण का शिकार रहे किसी भी उम्र वाले व्यक्ति को बालों की ये दिक्कत हो सकती है।


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स्रोत और संदर्भ
Risk of Alopecia Areata After COVID-19

अस्वीकरण: 
अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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