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कोरोना वायरस के बारे में 10 जरूरी बातें जो आप नहीं जानते

Sun, 29 Mar 2020 03:59 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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कोरोना वायरस के बारे में - फोटो : PTI
दुनिया के ज्यादातर देश लॉकडाउन में हैं। कई देशों ने अपने यहां कर्फ्यू लगा दिया है। लगभग देशों ने अपनी सीमा को बंद कर दिया है। क्या जमीन क्या आसमान सब कुछ बंद। लोग घरों में कैद हैं। लग रहा है कितना वक्त या अरसा गुजर चुका है इस तरह रहते हुए। दुनिया को कोरोना वायरस के बारे में अभी कुछ महीनों पहले यानी बीते साल दिसंबर में ही पता चला था।

दुनिया भर के वैज्ञानिक शोधकर्ता इस वायरस के बारे में जानने की कोशिश में लगे हुए हैं ताकि इसके लिए वैक्सीन बनाया जा सके। लेकिन वैक्सीन अभी दूर की बात है। दुनिया को तो अभी इस वायरस के बारे में ही बहुत कम जानकारी है। बहुत सी बातें हैं जिनके जवाब नहीं मिले हैं। लेकिन इन जवाबों को तलाशने का काम सिर्फ वैज्ञानिक या शोधकर्ता नहीं कर रहे। घर में बैठा हर शख्स अपने-अपने स्तर पर इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश कर रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस से अब तक कितने लोग संक्रमित हुए हैं ?
यह सबसे आम लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। दुनिया भर में सिर्फ संक्रमण के मामलों की बात करें तो छह लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं जबकि मरने वालों का आँकड़ा 30 हजार के पार पहुंच चुका है। लेकिन क्या ये बिल्कुल सटीक आंकड़े हैं?

शायद नहीं। बहुत हद तक संभव है कि संक्रमित मामलों का सिर्फ एक अंश मात्र हो। इन आँकड़ों पर यकीन करना उस दशा में मुश्किल हो जाता है जब हम उन मामलों के बारे में सोचते हैं जो सामने नहीं आए हैं। ऐसे मामले जिनमें कोई शख्स संक्रमित तो है लेकिन उसमें इस संक्रमण के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहा। ना ही उन्हें किसी तरह की कमजोरी महसूस हो रही है और ना दूसरा कोई लक्षण।

एंटीबॉडी टेस्ट ईजाद करने के बाद ही शोधकर्ता ये देख पाएंगे कि किसी में वायरस है या नहीं। इसके बाद ही कहीं जाकर हम ये पता कर पाएंगे कि कोरोना वायरस ने कितने लोगों को और कितनी आसानी से अपना शिकार बनाया।
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आखिर यह कितना खतरनाक है?
जब तक हमें ये जानकारी नहीं है कि संक्रमण के कुल मामले कितने हैं, तब तक कोविड 19 की सटीक मृत्यु दर निकालना असंभव है। फिलहाल जो आकलन किया जा रहा है, उसके मुताबिक, कोरोनोवायरस से संक्रमित होने वाले कुल लोगों में से एक फीसदी लोगों की मौत हो रही है। लेकिन अगर ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा होगी जिनमें लक्षण स्पष्ट नहीं हैं तो इसके आधार पर निकाली गई मृत्यु दर कम हो सकती है।

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सामान्य लक्षणों के अलावा क्या हो सकते हैं संभावित लक्षण
अगर कोरोना वायरस के सामान्य लक्षणों की बात करें तो इसमें बुखार और सूखी खांसी होती है। अगर आपको ये लक्षण खुद में दिखें तो संभव है कि आप पॉजीटिव हो सकते हैं। कुछ मामलो में गले में खराश, सिर दर्द और डायरिया की शिकायत भी पायी गई थी, जिसके बाद टेस्ट कराने पर रिजल्ट पॉजिटिव आया।

हाल के दिनों में एक और लक्षण सामने आया है
बहुत से लोगों ने बताया कि उन्हें किसी भी चीज की गंध समझ नहीं आ रही थी। यानी ये भी एक लक्षण है। लेकिन सबसे अहम सवाल यह है कि क्या हल्की या सामान्य सर्दी के लक्षण जैसे नाक बहना और छींकना भी कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं? दरअसल कुछ मामले इन लक्षणों के साथ भी सामने आए हैं। कई शोधों के मुताबिक, ऐसा भी हो सकता है कि कोई शख्स संक्रमित हो लेकिन उसमें कोई लक्षण नजर ना आए और उसे पता ही ना चले कि वो संक्रमित है।
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बच्चे किस तरह इस वायरस को फैलाने में मदद कर रहे हैं?
अभी तक यही कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस से सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों को है लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि यह बच्चों को नहीं हो सकता। कोरोना वायरस संक्रमण बच्चों को भी हो सकता है। हालांकि उनमें संक्रमण बेहद धीमा पाया गया है और अभी तक दुनिया भर में बच्चों के मरने के मामले भी कम ही आए हैं।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इस वायरस के प्रसार में बच्चों की भूमिका बेहद अहम है। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि बच्चे अक्सर अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों से मिलते (पार्क और प्लेग्राउंड में खेलने के दौरान) हैं। इस वायरस के मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि बच्चे इसे किस स्तर तक फैला सकते हैं।
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कोरोना वायरस आखिर आया कहां से?
इस वायरस के सबसे शुरुआती मामले चीन के वुहान शहर में मिले। साल 2019 खत्म होने की कग़ार पर थी, उस वक्त दुनिया को वुहान में पनपे इस वायरस के बारे में पता चला। ऐसा माना जा रहा है कि यह वायरस वुहान के 'वेट-मार्केट' से आया।

कोरोना वायरस को आधिकारिक तौर पर Sars-CoV-2 कहा जा रहा है। यह वायरस उस वायरल का बेहद करीबी माना जा रहा है जो चमगादड़ों को संक्रमित करता है। एक मान्यता ये भी है कि कोरोना वायरस चमगादड़ से सीधे इंसानों में नहीं आया। चमगादड़ और इंसान के बीच में कोई 'रहस्यमय जीव' माध्यम बना। इस रहस्यमय जीव को लेकर कई तरह के तर्क हैं लेकिन प्रामाणिक तौर पर कोई कुछ भी नहीं कह सकता और बहुत हद तक संभव है कि इससे आगे आने वाले समय में भी संक्रमण और बढ़े।
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क्या गर्मी आने पर कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में कमी आएगी?
अगर सामान्य सर्दी-जुकाम की बात करें तो यह सर्दियों में ज्यादा और गर्मी में अपेक्षाकृत कम होती है। लेकिन अभी तक यह नहीं पता है कि गर्मी में यह वायरस क्या गुल खिलाएगा। इसका संक्रमण कम हो जाएगा या यूं ही बना रहेगा। इसे लेकर कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता। ब्रिटिश सरकार के साइंटफिक एडवाइजर ने चेतावनी दी है कि यह अभी तक बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि कोरोना वायरस पर मौसम का असर होगा। अगर यह एक ही है तो उन्हें लगता है कि यह सर्दी और जुकाम की तुलना में छोटा होगा। 

पर अगर गर्मी आने पर कोरोना वायरस के मामलों में एकाएक कमी आई तो इस बात का डर भी रहेगा कि सर्दियां आने पर इन मामलों में तेजी आएगी। उस वक्त में भी अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए इससे निपटना मुश्किल होगा क्योंकि सर्दी के दिनों में सामान्य फ्लू और दूसरी बीमारियों के मामले अधिक होते हैं।

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आखिर कुछ लोगों में इसके लक्षण इतने तीव्र कैसे ?
ज्यादातर लोगों में कोविड-19 के बेहद हल्के लक्षण देखने को मिले हैं। वहीं करीब 20 फीसदी ऐसे लोग भी हैं जिनमें इसका संक्रमण बहुत तीव्र पाया गया। लेकिन क्यों? इसका पूरा संबंध इंसान के रोग प्रतिरक्षा तंत्र से है। इसके अलावा कुछ आनुवांशिक कारण भी हो सकते हैं।

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इम्यूनिटी कब तक इसका मुकाबला कर सकती है?
कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए कोई रोग प्रतिरोधक क्षमता कितनी टिकाऊ है इसका कोई प्रमाण तो उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में कयास अधिक हैं। अगर कोई संक्रमित शख्स वायरस से मुकाबला कर रहा है तो इसका सीधा मतलब ये है कि उसने अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित किया है।

लेकिन एक तथ्य यह भी है कि यह वायरस अटैक बहुत नया है और इसके बारे में बेहद सीमित जानकारी है। जहां तक बात इम्यूनिटी की है कि आगे क्या होगा क्या नहीं तो यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है।
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क्या यह वायरस परिवर्तित भी होगा?
वायरस हर समय परिवर्तित होता रहता है लेकिन अधिकतर मामलों में उनके जेनेटिक कोड में कोई खास बदलाव नहीं आता है। आपको लगता है कि परिवर्तित होने के साथ ही वायरस कम घातक होता जाएगा लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है।

फिलहाल चिंता तो इस बात की है कि अगर यह वायरस परिवर्तित हुआ तो इम्यून सिस्टम इसकी पहचान नहीं कर पाएगा और अगर इसकी मौजूदा कोडिंग के आधार पर कोई वैक्सिन तैयार की गई तो वो लंबे वक्त के लिए कारगर साबित नहीं होगी। (जैसा की फ्लू के साथ है)
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