क्या आपको भी छोटी-छोटी चीजें भूलने लगी हैं, लोगों का नाम-रोजाना के काम तक भी याद नहीं रहते? अगर हां, तो ये चेतावनी है कि आपको अलर्ट हो जाना चाहिए। लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने ब्रेन हेल्थ को तो काफी नुकसान पहुंचाया ही है साथ ही अब विशेषज्ञ इन बढ़ती समस्याओं के लिए पर्यावरणीय कारकों को भी जिम्मेदार मान रहे हैं।
अध्ययन में कहा गया है कि जिस तरह से हाल के दशकों में हवा की गुणवत्ता खराब होती गई है, वायु प्रदूषण और हवा में पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्मकणों की मात्रा बढ़ती जा रही है इसका लोगों की सेहत पर कई तरह से नकारात्मक असर देखा जा रहा है। मस्तिष्क की सेहत के लिए बढ़ते प्रदूषण को और भी खतरनाक पाया गया है।
जर्नल प्लस मेडिसिन में प्रकाशित इससे संबंधित एक रिपोर्ट से पता चला है कि बढ़ता वायु प्रदूषण न सिर्फ लोगों की याददाश्त छीन रहा है साथ ही अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का खतरा भी बढ़ाता जा रहा है। जिन इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार खराब रहता है वहां के लोगों में इस तरह की समस्याओं का खतरा सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।