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Health Tips: प्रदूषण, धुंध और सर्दी.. दिल्ली में बढ़ी सांस लेने की परेशानी, ये लापरवाहियां हो सकती हैं जानलेवा

Sun, 23 Nov 2025 07:55 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pollution Health Danger: दिल्ली में पिछले कई दिनों प्रदूषण का स्तर लगभग 400+ AQI है। जाहिर है इसका असर बच्चे से लेकर बूढ़े तक हर किसी पर पड़ रहा है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि कौन सी लापरवाहियां आपके सेहत के लिए नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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प्रदूषण में सेहत पर प्रभाव - फोटो : Amar Ujala
Winter Pollution India: दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में सर्दियों के आते ही वायु प्रदूषण, घना धुंध और ठंडी हवा का घातक मिश्रण एक गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर देता है। प्रदूषण का अधिक स्तर और गिरता तापमान मिलकर सांस की समस्याओं, विशेषकर अस्थमा, सीओपीडी और ब्रोंकाइटिस के मरीजों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा देते हैं। वातावरण में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण श्वसन मार्ग में स्थायी सूजन पैदा करते हैं।

इस जानलेवा वातावरण में हमारी रोजमर्रा की कुछ लापरवाहियां स्थिति को और बदतर बना सकती हैं और स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं। यह समझना जरूरी है कि प्रदूषित हवा में सांस लेने से सिर्फ फेफड़े ही नहीं, बल्कि हृदय और रक्त वाहिकाएं भी प्रभावित होती हैं। इस गंभीर स्वास्थ्य जोखिम को कम करने के लिए कुछ आम और खतरनाक लापरवाहियों को तुरंत सुधारना आवश्यक है। ये छोटे-छोटे सुधार आपके स्वास्थ्य में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
अधिक AQI में बाहर व्यायाम करना
अधिक AQI वाले वातावरण में बाहर मॉर्निंग वॉक करना या कठिन व्यायाम करना सबसे बड़ी लापरवाही है। व्यायाम के दौरान हम तेजी से और गहराई से सांस लेते हैं, जिससे फेफड़ों तक पहुंचने वाले PM2.5 कणों की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। ये कण रक्त में मिलकर सूजन पैदा करते हैं और हृदय पर दबाव डालते हैं।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
घर के अंदर धूम्रपान या कुछ जलाना
बहुत से लोगों को मालूम है कि घर के अंदर धूम्रपान करना या धूपबत्ती/मच्छर कॉइल जलाना इनडोर प्रदूषण को बढ़ा देता है। बंद कमरे में इनका धुआं आसानी से बाहर नहीं निकल पाता, जिससे PM2.5 कणों का स्तर तेजी से बढ़ता है और सांस की नली में जलन पैदा करता है।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
मास्क पहनने में लापरवाही
जब AQI 'बहुत खराब' या 'गंभीर' श्रेणी में हो, तब N95 या N99 मास्क न पहनना एक जानलेवा लापरवाही है। ये मास्क ही एकमात्र प्रभावी तरीका है जो सूक्ष्म PM2.5 कणों को फेफड़ों तक पहुंचने से रोकते हैं। बिना मास्क के बाहर निकलना फेफड़ों और हृदय को सीधा नुकसान पहुंचाता है।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
पानी कम पीना और हाइड्रेशन की कमी
सर्दियों में कम प्यास लगने के कारण लोग पानी कम पीते हैं, जिससे शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है। डिहाइड्रेशन से श्वसन मार्ग की श्लेष्मा झिल्ली सूख जाती है। सूखी झिल्ली प्रदूषकों और वायरस को फिल्टर करने में कम प्रभावी होती है, जिससे संक्रमण और सांस की समस्याएं और अधिक बढ़ जाती हैं। इसलिए इस लेख बताए गए लापरवाहियों को नजरअंदाज न करें, और सावधानी बरतें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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