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Air Pollution: आपके खून में जहर घोल रहीं हैं आपकी ये चार आदतें, हो जाएं अलर्ट वरना होगा जान का जोखिम

Sun, 16 Nov 2025 05:56 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Heart Risk Pollution: वायु प्रदूषण की वजह से इन दिनों बहुत से लोग परेशान हैं। दिल्ली के कई हिस्सों में तो एक्यूआई 300-400 के बीच में हैं। ऐसे में कुछ गलतियां हमारे खून में जहर घोलने का काम कर सकती हैं, इसलिए सतर्कता बरतना जरूरी है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Amar Ujala
Pollution Health Dangers: दिल्ली एनसीआई में इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम पर है। कुछ जगहों पर तो एक्यूआई कई दिनों से 300 से 400 के बीच ही बना हुआ है। जाहिर है इस प्रदूषण का खराब असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। खतरनाक स्तर का वायु प्रदूषण हमारी रोजमर्रा की आदतों के माध्यम से दबे पांव हमारे खून में जहर घोलने का काम कर रहा है। खासकर जब एक्यूआई का स्तर खतरनाक हो, तब हमारी कुछ लापरवाही भरी आदतें इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं।

वातावरण में मौजूद PM2.5 जैसे अति सूक्ष्म कण न सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि श्वसन तंत्र से होते हुए सीधे ब्लड फ्लो में प्रवेश कर जाते हैं। ये कण खून में जाकर सूजन पैदा करते हैं, रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर देते हैं और दिल के दौरे तथा स्ट्रोक के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं।

इसलिए यह समझना जरूरी है कि प्रदूषित हवा के संपर्क में आने पर, आपकी कुछ आदतें इस प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं और आपके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। इसलिए इन आदतों के बारे में जानना और उसे सुधारना जीवन रक्षा के लिए बहुत जरूरी है। आइए इस लेख में ऐसे ही कुछ आदतों के बारे में जानते हैं, जिसे सुधारकर आप अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकें।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
हाई एक्यूआई में मॉर्निंग वॉक करना
जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 या उससे अधिक हो, तब भी बाहर मॉर्निंग वॉक करना या अधिक तिव्रता वाले व्यायाम करना आपके सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है। व्यायाम के दौरान सांस लेने की दर बढ़ जाती है, जिससे फेफड़ों तक पहुंचने वाले प्रदूषकों (PM2.5) की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है।

ये कण तेजी से ब्लड फ्लो में प्रवेश कर हृदय पर अनावश्यक तनाव डालते हैं। अधिक एक्यूआई में खूले वातावरण में व्यायाम करने से फेफड़ों में सूजन और खून के थक्के जमने का खतरा बढ़ जाता है।

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धूम्रपान के नुकसान - फोटो : Freepik.com
बंद कमरे या घर के अंदर धूम्रपान करना
कई लोग यह सोचते हैं कि वे बाहर के प्रदूषण से बचने के लिए घर के अंदर हैं, लेकिन यदि वे घर के अंदर धूम्रपान करते हैं, तो वे अपनी और घर में रहने वाले अन्य लोगों की सेहत को भी दोगुना नुकसान पहुंचा रहे हैं। सिगरेट का धुआं PM2.5 और हानिकारक रसायनों का एक बड़ा स्रोत है। बंद कमरे में धूम्रपान करने से घर के अंदर का प्रदूषण स्तर कई गुना बढ़ जाता है, जिससे यह धुआं सीधे आपके खून में पहुंचकर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।

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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
बाहर निकलते समय मास्क न पहनना
अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक वाले वातावरण में मास्क (विशेषकर N95 या N99) न पहनना भी एक बड़ी गलती है। जब हवा में PM2.5 जैसे महीन कणों का स्तर 300 या 400+ हो, तब ये कण नाक और गले के प्राकृतिक फिल्टर को भेदकर सीधे फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं।

मास्क इन खतरनाक सूक्ष्म कणों को प्रभावी ढंग से फिल्टर करता है। बिना मास्क के बाहर निकलने पर, ये जहरीले कण सीधे रक्तप्रवाह में मिलकर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
 
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वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
इनडोर प्रदूषण बढ़ाने वाली चीजें जलाना
घर के अंदर प्रदूषण का स्तर बढ़ाने वाली चीजें, जैसे धूपबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल, या लकड़ी/कोयला जलाना भी आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ये चीजें जलने पर कार्बन मोनोऑक्साइड और PM2.5 के महीन कण छोड़ती हैं, जो हवा को तेजी से प्रदूषित करते हैं। बंद जगहों पर इनका धुआं आसानी से बाहर नहीं निकल पाता और सांस के जरिए सीधे खून में प्रवेश कर जाता है, जिससे हृदय और श्वसन संबंधी रोग होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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