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कौन उठाएगा आपको लगने वाले टीके का खर्च, कितनी लेनी होगी कोरोना वैक्सीन की खुराक, जानें सबकुछ

Sat, 02 Jan 2021 11:53 AM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप भारत में लगातार जारी है। जहां सबको उम्मीद थी कि इस साल ये वायरस खत्म हो जाएगा, तो वहीं सबकी उम्मीदों को उस वक्त धक्का लगा जब ब्रिटेन के बाद भारत में भी इसका नया स्ट्रेन यानी प्रकार मिला। इन सबके बीच अब जल्द ही भारत सरकार वैक्सीन लॉन्च करने की तैयारी में है और किसी भी दिन टीकाकरण की प्रक्रिया को शुरू किया जा सकता है। लेकिन लोगों के मन में इस वैक्सीन को लेकर काफी सवाल घूम रहे हैं, जिनमें इसकी कीमत से लेकर इसका खर्च कौन उठाएगा तक शामिल है। तो चलिए जानते हैं इन सब सवालों के जवाब।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेज यानी एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने इन सब सवालों के जवाब दिए, जिससे ये समझा जा सकता है कि आखिर ये टीकाकरण की प्रक्रिया कैसे संभव होगी। डॉक्टर गुलेरिया ने बताया कि वैक्सीन के लॉन्च होने के बाद सरकार अगले छह से आठ महीनों के अंदर देश के 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन देने की योजना बना रही है। इनमें, डॉक्टर-नर्स, पुलिसकर्मी समेत अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल होंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
लोगों के मन में ये सवाल भी है कि इस वैक्सीन का खर्च आखिर कौन उठाएगा? इस पर डॉक्टर गुलेरिया ने बताया कि वैक्सीन की लागत का वहन सरकार कर रही है। ये बाकी टीकाकरण कार्यक्रमों के हिस्से की तरह ही है। उन्होंने ये भी बताया कि हर व्यक्ति को वैक्सीन की खुराक देने के लिए 28 दिन का ही अंतराल जरूरी नहीं है। ब्रिटेन में पहली और दूसरी डोज के बीच का अंतराल 28 से 12 हफ्तों के बीच का है। ऐसा इसलिए ताकि कोरोना की पहली डोज ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिल सके।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
पहली डोज देने से लोगों की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़वा सकते हैं। साथ ही इससे दूसरी खुराक लगाने का दबाव भी खत्म होगा। डॉक्टर गुलेरिया ने ये भी बताया कि वो एक कमेटी की अध्यक्षता कर रहे हैं, जहां उन्होंने कई मानक तय किए हैं। किडनी रोग, डायबिटीज, श्वसन रोग आदि को लेकर एक स्कोरिंग सिस्टम की कोशिश हो रही है, जिसके आधार पर गंभीर बीमारियों से घिरे लोगों के बीच भी प्राथामिकता तय की जा सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉक्टर गुलेरिया ने इस बात को उदाहरण से समझाते हुए कहा, 'उदाहरण के तौर पर ऐसे व्यक्ति जिसकी डायबिटीज नियंत्रण में है और दूसरा ऐसा शख्स जो पिछले दस साल से इंसुलिन ले रहा है। ऐसे में ज्यादा गंभीर मधुमेह वाले व्यक्ति को दूसरे की तुलना में प्राथमिकता में ऊपर रखा जाएगा।' सरकार ने एक कमेटी गठित की, जिसने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा उत्पादित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी एस्ट्रा जेनेका की वैकसीन को भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल के पास मंजूरी के लिए भेजा है।
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