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Screen Time: आंखों से लेकर मस्तिष्क तक को गंभीर क्षति पहुंचा रही है ये एक आदत, ब्रेन का साइज हो रहा है पतला

Thu, 15 Feb 2024 12:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्क्रीन टाइम का ब्रेन पर होने वाला असर - फोटो : istock
मोबाइल-कंप्यूटर और टीवी जैसे स्क्रीन के बढ़ते उपयोग को अध्ययनों में सेहत के लिए कई प्रकार से समस्याकारक माना जाता रहा है। सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक हम कई प्रकार के स्क्रीन वाले उपकरणों से घिरे रहते हैं, पर क्या आपने कभी सोचा कि ये सेहत के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं? इससे आंखों से लेकर मस्तिष्क तक की कई प्रकार की समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने बताया, जो लोग स्क्रीन के अधिक संपर्क में रहते हैं उनमें मस्तिष्क से संबंधित गंभीर बीमारियों का जोखिम भी हो सकता है। विशेषतौर पर बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर अध्ययनकर्ताओं ने चेतावनी जारी की है।

स्क्रीन पर अधिक समय बितने को अब तक आंखों की बीमारियों, नींद न आने की समस्या या फिर अवसाद के जोखिमों से संबंधित माना जाता रहा था। पर एक हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि इसका मस्तिष्क पर भी गंभीर प्रकार से असर हो सकता है। इतना गंभीर कि इससे सामाजिक कौशल में कमी से लेकर न्यूरोलॉजिकल विकारों के विकसित होने तक का खतरा हो सकता है।
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स्क्रीन टाइम बढ़ने से होने वाले नुकसान - फोटो : istock
डिजिटल स्क्रीन के हो सकते हैं कई दुष्प्रभाव

अध्ययनकर्ता बताते हैं, आठ वर्ष और उससे कम उम्र के लगभग आधे बच्चों के पास मोबाइल-टैबलेट्स की सहज उपलब्धता है। बच्चों का प्रतिदिन औसतन 2.25 घंटे डिजिटल स्क्रीन पर बिताता है। स्क्रीन टाइम बच्चों के दिमाग पर क्या प्रभाव डाल रहा है? इसको समझने के लिए किए गए एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया ये बच्चों को मस्तिष्क के विकास को तो प्रभावित करता ही है साथ ही उनमें सामाजिक कौशल में विकास की समस्या, न्यूरोलॉजिकल विकारों को भी बढ़ाने वाला हो सकता है। 

बच्चों के साथ वयस्कों में भी बढे़ हुए स्क्रीन टाइम के कई प्रकार के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
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मस्तिष्क स्वास्थ्य पर गंभीर असर - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

साल 2018 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों का स्क्रीन-टाइम प्रतिदिन दो घंटे से अधिक था उनमें भाषा-सोचने की क्षमता कम पाई गई। शोधकर्ताओं ने बताया कि स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से मस्तिष्क का कॉर्टेक्स पतला होने लगता है, ये हिस्सा सोचने, याददाश्त को बनाए रखने और तर्क की क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी हो जाता है।

न्यूयॉर्क के हॉस्पिटल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेनिफर एफ. क्रॉस कहती हैं, इस बात के सबूत हैं कि छोटे बच्चों में स्क्रीन टाइम अधिक होने से मस्तिष्क में कुछ संरचनात्मक परिवर्तन हो सकते हैं, जिसका क्वालिटी ऑफ लाइफ पर भी नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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स्क्रीन टाइम का बढ़ना हो सकता है समस्याकारक - फोटो : istock
मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर भी असर

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने बताया, स्क्रीन टाइम का बढ़ना कई  प्रकार से मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाला हो सकता है। इसका एक दुष्प्रभाव नींद की कमी से भी संबंधित है। स्मार्टफोन या डिजिटल उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी, नींद के लिए आवश्यक हार्मोन मेलाटोनिन के स्राव को प्रभावित कर देती है, जिससे  आपमें अनिद्रा और नींद के अन्य विकारों का खतरा बढ़ जाता है।

नींद की कमी को पहले के अध्ययनों में मस्तिष्क की कार्यक्षमता में कमी से संबंधित बताया गया था। यानी कि अगर आप लंबे समय तक रोजाना स्क्रीन के संपर्क में रहते हैं तो ये नींद विकारों का कारण बन सकती है जिसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं का खतरा हो सकता है। 
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मोबाइल स्क्रीन से होने वाले नुकसान - फोटो : istock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोबाइल-कंप्यूटर का बढ़ता इस्तेमाल सभी उम्र के लोगों के लिए हानिकारक है। बच्चों-वयस्कों सभी में इसके कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसके जोखिम सिर्फ मस्तिष्क की समस्याओं तक ही सीमित नहीं हैं, शरीर पर इसके कई अन्य प्रकार के खतरे हो सकते हैं। मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार की सेहत पर इसके साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं। 



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स्रोत और संदर्भ
Excessive Screen Time on Child Development: An Updated Review and Strategies for Management


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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