मस्तिष्क स्वास्थ्य पर गंभीर असर
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अध्ययन में क्या पता चला?
साल 2018 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों का स्क्रीन-टाइम प्रतिदिन दो घंटे से अधिक था उनमें भाषा-सोचने की क्षमता कम पाई गई। शोधकर्ताओं ने बताया कि स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से मस्तिष्क का कॉर्टेक्स पतला होने लगता है, ये हिस्सा सोचने, याददाश्त को बनाए रखने और तर्क की क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी हो जाता है।
न्यूयॉर्क के हॉस्पिटल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेनिफर एफ. क्रॉस कहती हैं, इस बात के सबूत हैं कि छोटे बच्चों में स्क्रीन टाइम अधिक होने से मस्तिष्क में कुछ संरचनात्मक परिवर्तन हो सकते हैं, जिसका क्वालिटी ऑफ लाइफ पर भी नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।