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रोचक: इस ब्लड ग्रुप वाले कोरोना के सबसे ज्यादा शिकार, लेकिन इनसे अन्य लोगों को खतरा सबसे कम

Fri, 02 Apr 2021 05:20 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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Blood Group
कोरोना संक्रमण को लेकर पूरे देश में चर्चा फिर से तेज हो गई है। कई राज्यों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीच शोधकर्ताओं ने एक बड़ी ही रोचक जानकारी लोगों के सामने रखी है। हाल ही में किए एक अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि एबी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप वाले लोगों से कोरोना के संक्रमण फैलने का खतरा सबसे कम होता है। यहां रोचक बात यह है कि इस  ब्लड ग्रुप वाले लोग संक्रमण के शिकार भी सबसे ज्यादा हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान के प्रोफेसर और उनकी टीम ने 509 लोगों पर अध्ययन के आधार पर ये नतीजा निकाला। आइए जानते हैं कि इस अध्ययन में और क्या खास जानने को मिला?
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prayagraj news : Covid - 19 - फोटो : prayagraj
ज्यादार लोग एसिम्टोमैटिक
शोधकर्ताओं की टीम ने 18-65 की आयु वाले  509 लोगों के रक्त और एंटीबॉडी का परीक्षण किया। इनमें से 36 फीसदी लोगों का ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव था। जांच के दौरान पाया गया कि इस ब्लड ग्रुप वाले ज्यादातर लोगों में कोरोना के लक्षण नजर नहीं आते, यानी इसमें एसिम्टोमैटिक होने की संभावना अधिक होती है। सरल भाषा में समझा जाए तो खांसी, जुकाम, बुखार और छींक आने जैसे लक्षण इस ब्लड ग्रुप वाले ज्यादातर लोगों में देखने को नहीं मिलते हैं।
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Blood Group
शोधकर्ताओं ने पाया कि ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव वाले लोगों में संक्रमण की दर ब्लड ग्रुप ए और बी से 27 गुना जबकि ब्लड ग्रुप ओ वाले लोगों से 152 गुना अधिक होती है। भले ही ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव वाले लोगों में संक्रमण की दर ज्यादा देखी गई लेकिन इनसे दूसरे लोगों को खतरा काफी कम पाया गया। 

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कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
संपर्क में आने वालों में प्रभाव कम
विशेषज्ञों के मुताबिक चूंकि एबी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप वाले ज्यादातर लोग एसिम्टोमैटिक होते हैं, इसलिए उन्हें संक्रमण का पता ही नहीं चल पाता है। इतना ही नहीं ऐसे लोगों के संपर्क में आए दूसरे लोगों में कोरोना का प्रभाव भी न के बराबर देखा गया। वहीं दूसरे  ब्लड ग्रुप वाले संक्रमितों के परिजनों और साथ रहने वाले लोगों को अस्पताल जाने की जरूरत भी ज्यादा महसूस हुई।
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कोरोना वायरस - फोटो : social media
क्या है कारण?
शोध के प्रमुख प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के मुताबिक अन्य लोगों के साथ एबी ब्लड ग्रुप वालों के जीन विश्लेषण के दौरान देखने को मिला कि क्रोमोजोम में म्यूटेशन के कारण एबी ब्लड ग्रुप वाले लोगों से दूसरों को संक्रमण का खतरा कम होता है। 'आरएस 505922' नामक म्यूटेशन के कारण ही इस ब्लड ग्रुप वाले ज्यादातर लोग एसिम्टोमैटिक होते हैं। इसके साथ ही ऐसे लोगों से दूसरों को खतरा भी कम होता है। 
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