दुनियाभर में जिस तरह से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, इसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं। भारत में संक्रामक रोगों का जोखिम और भी ज्यादा देखा जा रहा है। हाल ही में पश्चिम बंगाल और इससे पहले केरल में
स्वास्थ्य संकट बना निपाह वायरस हो या फिर ब्रेन ईटिंग अमीबा संक्रमण और बर्ड फ्लू, इन सभी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इनमें से ज्यादातर जूनोटिक बीमारियां होती हैं। जूनोटिक रोग उन संक्रामक बीमारियों को कहा जाता है जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं। अब कर्नाटक में भी ऐसी ही एक बीमारी को लेकर अलर्ट किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्नाटक में हाल ही में 29 साल के एक व्यक्ति की क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी) से मौत हो गई। इसे आमतौर पर मंकी फीवर के नाम से भी जाना जाता है। इस घटना ने एक ऐसी बीमारी पर फिर से ध्यान खींचा है, जिसके मामले अक्सर तब तक रिपोर्ट नहीं होते जब तक कि ये बहुत बढ़ नहीं जाते और जानलेवा नहीं हो जाते। खबरों के मुताबिक बीती 28 जनवरी को उडुपी जिले के एक अस्पताल में संक्रमित व्यक्ति की मौत हो गई।
इस मामले के बाद से लोगों के मन में संक्रमण को लेकर कई तरह के सवाल हैं। क्या ये बंदरों के काटने से फैलता है, किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है और इससे बचाव को लेकर क्या उपाय किए जाने चाहिए?