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Alert: 10 में से 7 भारतीयों को नहीं मिल पा रहा है ये जरूरी पोषक तत्व, शुगर-वजन बढ़ने की हो सकती है वजह

Tue, 24 Feb 2026 08:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डॉक्टर कहते हैं, 10 में से 7 भारतीय अपनी रोजाना की फाइबर की जरूरत पूरी नहीं कर पाते हैं। आपको अपने पाचन, एनर्जी और पूरी हेल्थ को ठीक रखने के लिए आहार से भरपूर फाइबर लेना चाहिए। इसकी कमी के कई नुकसान हो सकते हैं।
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भारतीयों की डाइट में फाइबर की कमी - फोटो : Freepik.com
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आहार में सुधार करना सबसे जरूरी माना जाता है। आप रोजाना जो कुछ भी खाते-पीते हैं इसका सेहत पर सीधा असर होता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को रोजाना ऐसी चीजों का सेवन करते रहने की सलाह देते हैं जिससे जरूरी पोषक तत्वों की आसानी से पूर्ति की जा सके।

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत को ठीक रखने के लिए केवल विटामिन और प्रोटीन ही नहीं, बल्कि फाइबर वाली चीजों का नियमित सेवन भी बेहद जरूरी है। क्या आपकी डाइट में फाइबर से भरपूर चीजें हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना कम से कम 25 ग्राम फाइबर लेना चाहिए, लेकिन भारत सहित कई देशों में अधिकांश लोग इससे काफी कम मात्रा में फाइबर ले रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डाइट में फाइबर की कमी सेहत के लिए बड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है। ज्यादातर भारतीयों में फाइबर की कमी का खतरा चिंताजनक है।
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खान पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. शुभम वात्स्य के अनुसार, लगभग 70% भारतीय यानी 10 में से 7 भारतीय अपनी रोज की फाइबर की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण लोगों में कब्ज, पेट फूलने, फैटी लिवर, डायबिटीद और दूसरी मेटाबोलिक बीमारियों का खतरा हो सकता है।

 


फाइबर हमारी सेहत के लिए जरूरी नहीं है। घुलनशील फाइबर ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करता है, जबकि अघुलनशील फाइबर मल त्याग और गट मोटिलिटी को बेहतर बनाता है। ये दोनों प्रकार के फाइबर साथ मिलकर गट बैक्टीरिया को पोषण देते हैं जो पाचन को ठीक रखने से लेकर कई बीमारियों से बचाने के लिए जरूरी है।
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पाचन की बढ़ सकती हैं दिक्कतें - फोटो : adobe stock images
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लोगों की खराब होती डाइट रिफाइंड-जंक फूड्स और प्रोसेस्ड डाइट का बढ़ता चलन फाइबर की कमी का कारण बनता जा रहा है। पर्याप्त फाइबर लेने से न केवल पाचन बेहतर होता है, बल्कि यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने, कोलेस्ट्रॉल कम करने और वजन संतुलित रखने में भी मदद करता है। फाइबर की कमी सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है।  

बढ़ सकती हैं पाचन की दिक्कतें

फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है। फाइबर मल को नरम बनाता है, जिससे कब्ज की समस्या कम होती है। इसके अलावा, यह आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है, जिससे पाचन और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। 
 
  • पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज, बवासीर और आंतों से जुड़ी कई बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।

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डायबिटीज रोगियों के लिए जरूरी है फाइबर - फोटो : Freepik.com
हार्ट और डायबिटीज की समस्या

दिल को स्वस्थ रखने और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए भी हमें रोजाना फाइबर की जरूरत होती है। 
  • फाइबर वाली चीजें बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करती हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, हाई-फाइबर डाइट लेने से दिल की बीमारी का जोखिम कम हो सकता है। 
  • इसके अलावा, फाइबर ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ने देता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों में शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।
  • जो लोग फाइबर कम लेते हैं उनमें शुगर बढ़े रहने और दिल से संबंधित समस्याओं का जोखिम अधिक देखा जाता है।
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फाइबर रिच फूड्स का करिए सेवन - फोटो : Adobe Stock
कैसे करें फाइबर की पूर्ति

हम रोजाना की डाइट में सुधार करके आसानी से फाइबर की दैनिक जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
 
  • साबुत अनाज जैसे ओट्स, ब्राउन राइस, दालें, सेब-केला जैसे फलों में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। 
  • ब्रोकली, गाजर जैसी सब्जियां, नट्स और सीड्स भी फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
  • संतुलित आहार में फाइबर वाली चीजों को शामिल करने से शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ और बीमारियों से सुरक्षित रखना आसान हो सकता है।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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