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मानसून हेल्थ टिप्स: लगातार हो रही बारिश से बच्चों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा! जानें किन चीजों का रखें खास ध्यान

Mon, 28 Sep 2026 10:17 AM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Monsoon Health Tips for Children: कई दिनों से हो रही लगातार बारिश का असर अब लोगों में दिखने लगा है। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य पर क्या खतरा मंडरा रहा है और उनका बचाव कैसे करें, आइए जानते हैं। 
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बारिश में बच्चों के लिए 5 हेल्थ रिस्क - फोटो : AI
 Monsoon Health Tips for Children: लगातार बारिश और बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ सकता है। बारिश के दौरान जगह-जगह जलभराव, गंदा पानी, बढ़ती नमी और मच्छरों की संख्या कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है। इतना ही नहीं, बाहर का दूषित खाना-पानी और गंदे पानी के संपर्क में आना भी संक्रमण का कारण बन सकता है। 

ऐसे में माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चों की साफ-सफाई, खानपान और आसपास के वातावरण पर विशेष ध्यान दें। बारिश में बच्चों को किन 5 हेल्थ रिस्क का सामना करना पड़ सकता है और इनसे बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, आइए जानते हैं।
 
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बारिश में बच्चों के लिए 5 हेल्थ रिस्क - फोटो : AI
1. डेंगू और मलेरिया का खतरा

 बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है। यही वजह है कि मानसून में डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, ठंड लगना या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

 बचाव के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, बाल्टी और पानी की टंकियों की नियमित जांच करें। बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से मच्छररोधी उपाय अपनाएं।

 
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बारिश में बच्चों के लिए 5 हेल्थ रिस्क - फोटो : AI
 2. वायरल फीवर और दूसरे संक्रमण

 बारिश के दौरान मौसम में लगातार बदलाव, नमी और लोगों के बीच बढ़ता संपर्क वायरल संक्रमण के फैलने में भूमिका निभा सकता है। बच्चों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना और शरीर में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

 बच्चे को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ दें। हाथों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें और बीमार व्यक्ति के बेहद करीब संपर्क से बचाएं। अगर बुखार बहुत तेज हो, लंबे समय तक बना रहे या बच्चे की हालत बिगड़ती नजर आए, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

 

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बारिश में बच्चों के लिए 5 हेल्थ रिस्क - फोटो : AI
3. दस्त, उल्टी और पेट की बीमारी

 बारिश के मौसम में दूषित पानी और संक्रमित भोजन पेट से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। बच्चों में दस्त, उल्टी, पेट दर्द और भूख कम लगने जैसी समस्या हो सकती है। छोटे बच्चों में लगातार दस्त या उल्टी होने पर शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा भी हो सकता है।

 बच्चों को सुरक्षित और साफ पानी पिलाएं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर दें। खुले में बिकने वाले कटे फल, लंबे समय से खुले में रखा खाना और संदिग्ध पानी से बनी चीजों से बचना बेहतर है।

 
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बारिश में बच्चों के लिए 5 हेल्थ रिस्क - फोटो : AI
 4. त्वचा संक्रमण और फंगल इंफेक्शन

 बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ जाती है। अगर बच्चा लंबे समय तक गीले कपड़ों, जूतों या गंदे पानी के संपर्क में रहता है तो त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। खुजली, लाल चकत्ते, जलन और फंगल इंफेक्शन जैसी परेशानियां दिखाई दे सकती हैं।

 बारिश में भीगने के बाद बच्चे को साफ पानी से नहलाएं और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। गीले कपड़े और मोजे तुरंत बदल दें। पैरों को खास तौर पर सूखा रखें, क्योंकि लगातार नमी रहने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

 
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बारिश में बच्चों के लिए 5 हेल्थ रिस्क - फोटो : AI
5. एलर्जी और सांस संबंधी परेशानी

 बारिश के मौसम में घरों में सीलन और फंगस की समस्या बढ़ सकती है। नमी और फंगस कुछ बच्चों में एलर्जी के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। ऐसे बच्चों में छींक, नाक बंद होना, खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।

 घर के कमरों में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें और दीवारों या फर्नीचर पर दिखाई देने वाली सीलन और फंगस को साफ करें। बच्चे को धुएं, धूल और तेज गंध से दूर रखें। अगर बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही हो या लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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