पहला स्टेप : स्क्रीन से दूरी
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पहला स्टेप : स्क्रीन से दूरी
डोपामाइन डिटॉक्स की शुरुआत आपको छोटे स्तर से करनी चाहिए। आप चाहें तो दिन के दो से तीन घंटे ऐसे तय कर सकती हैं, जब मोबाइल, सोशल मीडिया, गेमिंग या इंटरनेट स्क्रॉलिंग से पूरी तरह दूर रहें। अगर इन घंटों को आप उन कामों में लगाएंगी, जिन्हें अक्सर टालती रहती हैं तो आपको अंदर से हल्का और संतोषपूर्ण महसूस होगा। इस दौरान किताब पढ़ना, डायरी लिखना, बगीचे में टहलना, ध्यान या योग करना, संगीत सुनना या परिवार से बातचीत करना, ये सभी बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। अगर आपको बागवानी पसंद है तो आप इसे भी कर सकती हैं।
दूसरा स्टेप : सुबह ‘नो स्क्रॉलिंग’
आज के समय में सोशल मीडिया से दूरी बनाना आसान नहीं है। बड़े ही नहीं, छोटे बच्चे भी इसकी लत के शिकार हो चुके हैं। इसलिए दिन की शुरुआत मोबाइल से न करें। अलार्म बंद करने के बाद फोन को हाथ में न पकड़ें। बालकनी में जाएं, ताजी हवा लें, हल्की धूप में बैठें और पेड़-पौधों को देखें, उन्हें पानी दें। इससे मन शांत होता है। फिर एक कप चाय या कॉफी बनाएं, अखबार पढ़ें या किताब के कुछ पन्ने पलटें। सुबह की शुरुआत अगर स्क्रीन से दूर रहकर होती है तो दिमाग ज्यादा तरोताजा महसूस करता है और दिन भर ऊर्जा बनी रहती है। यह छोटी-सी आदत मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होती है।
तीसरा स्टेप : ‘नो-स्क्रीन डे’
लंबे समय तक टिकाऊ बदलाव के लिए यह जरूरी है कि सप्ताह में कम से कम एक दिन ऐसा चुना जाए, जिसे पूरी तरह ‘नो-स्क्रीन डे’ बनाया जाए। इसे डिजिटल डिटॉक्स वीकेंड कह सकते हैं। उस दिन सोशल मीडिया और इंटरनेट से दूर रहकर आप प्रकृति, रिश्तों और अपने शौक से जुड़ सकती हैं। इस दिन समय निकालकर अपनी किसी दोस्त या रिश्तेदार से मिलें। हफ्ते भर के लिए सब्जियां और ग्रॉसरीज ले आना भी अच्छा विकल्प है। बच्चों और पति के साथ पास की किसी सुंदर जगह घूमने भी जाया जा सकता है या फिर घर के कुछ बचे कामों को भी पूरा किया जा सकता है। शुरुआत में यह प्रक्रिया मुश्किल लग सकती है, इसलिए धीरे-धीरे कदम बढ़ाएं। पहले कुछ घंटों से शुरू करें, फिर आधा दिन और अंततः पूरा दिन। समय के साथ यह आदत आपके जीवन का हिस्सा बन जाएगी और आप पाएंगी कि साधारण-सी लगने वाली गतिविधियां भी कितनी गहरी खुशी और संतुलन दे सकती हैं।