हिंदुधर्म में भाईदूज का दिन संस्कृति का एक विशिष्ट दिवस माना गया है। कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया होने के कारण इसे भाईदूज का नाम दिया गया है। रक्षा बंधन के त्योहार के समान ही इसका भी अपना महत्व है। पौराणिक कथानक के आधार पर यह भाई बहन के द्वारा मनाया जाने वाला महापर्व है। भाईदूज के नाम से वैसे तो यम और यमी की कहानी प्रचलन में है लेकिन इससे जुड़ी और भी कई सारी पौराणिक कथाएं हैं जो कि बताती हैं कि भाई-बहन से जुड़े इस दिन का इस संसार में कितना महत्व है। अगली स्लाइड्स में पढ़ें भाईदूज से जुड़ी तीन कथाएं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social media
कथा 1
एक राजा अपने साले के साथ चौपड़ खेलता था। साला हर बार जीत जाता था। राजा ने सोचा कि भाई दूज पर यह बहन से टीका कराने आता है, इसलिए जीत जाता है। अत: राजा ने भाई दूज आने पर साले को आने से रोक दिया, साथ ही कड़ा पहरा लगा दिया कि वह न आ सके। जब भैया दूज पर भाई- बहन के पास टीका कराने नहीं पहुंचा तो वह बहुत दुखी हुई। तब भाई यमराज की कृपा से कुत्ते का रूप धारण कर राजा के कड़े पहरे के बावजूद बहन के यहां पहुंचा। बहन टीका लगे हाथ बैठी थी। कुत्ते को देखकर उसने प्रेम से अपना टीके से सना हाथ उसके माथे पर फेरा। कुत्ता वापस चला गया। लौटकर वह राजा से बोला,मैं भाई दूज का टीका करा आया, आओ अब खेलें। राजा बहुत चकित हुआ।तब साले ने सारी बात सुनाई। राजा टीके का महत्व मान गया और अपनी बहन से टीका कराने चला गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
कथा 2
जैन धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ कल्पसूत्र में बताया गया है कि कार्तिक कृष्ण अमावस्या को भगवान महावीर के निर्वाण के पश्चात नन्दिवर्धन बहुत ही दु:खी हुए। तब उस घटना के तीसरे दिन अर्थात कार्तिक शुक्ल द्वितीया को नन्दिवर्धन की बहन सुदर्शना ने भाई को भोजन के लिए घर पर आमंत्रित किया। उसने अपने हाथों से बनाकर नन्दिवर्धन को सुस्वाद भोजन परोसे। अत: यह दिन भातृ द्वितीया या भाई दूज के नाम से प्रसिद्ध होकर हर दीपावली पर मनाया जाने लगा।
कथा 3
एक भाई अपनी बहन के यहां भाई दूज को टीका कराने गया, जब वह टीका कराकर और खाना खाकर लौटने लगा तो बहन ने आटा पीसकर रास्ते के लिए लड्डू बांध दिये। दुर्भाग्य से आटे की चक्की में एक सांप बैठा था जो पिस गया। भाई के जाने के बाद जब बहन को यह बात पता चली तो वह उसके पीछे दौड़ी। वह अपने बच्चे को अकेला सोते छोड़ गई। रास्तों और जंगलों को पार करती हर एक से पूछती वह एक पेड़ के नीचे पहुंची, जहां भाई दोपहर को सुस्ताने के लिए सो गया था। लड्डू की पोटली भाई ने एक पेड़ से बांध रखी थी। बहन ने झट वे लड्डू खोलकर फेंक दिये। रक्षा के लिए वह खुद ही भाई के साथ हो ली। रास्ते में एक औरत ने बताया कि जो सांप चक्की में पिसकर मर गया था, वह सांप व सांपिन तेरे भाई की शादी के दिन इसे काटने आएंगे। फिर ऐसा ही हुआ। सांप सांपिन दोनों आये, पर बहन ने उनके काटने से पहले ही उन्हें मारकर भाई को बचा लिया।