भगवान श्री कृष्ण के द्वारा नरकासुर राक्षस का वध करने पर
नरकासुर प्रागज्योतिषपुर नगर (जो इस समय नेपाल में है) का राजा था। उसने अपनी शक्ति से इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु आदि सभी देवताओं को परेशान कर दिया था। नरकासुर ने संतों आदि की 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था। जब नरकासुर का अत्याचार बढ़ गया तो देवता व ऋषिमुनि भगवान श्रीकृष्ण की शरण में गए और उससे मुक्ति की गुहार लुगाई। भगवान ने उन्हें मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। इसी खुशी में लोगों ने दूसरे दिन अर्थात कार्तिक मास की अमावस्या को अपने घरों में दिपक जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी तथा दीपावली का त्योहार मनाया जाता है।