रोज की भागदौड़ और कई जिम्मेदारियां दिमाग के भीतर भूचाल मचाये रखती हैं। ख्यालों की भीड़ और इनकी उलटी-सीधी चाल दिमाग का ट्रैफिक जाम कर देती है। इससे छुटकारा पाना है तो सोने से पहले 10 मिनट रोज लिखें डायरी।
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- फोटो : डायरी लेखन
करना यह है कि दिनभर दिमाग में आने वाले ख्यालों को एक-एक कर डायरी में सोने से पहले लिखना है। विचार कहां से और कब पैदा हुये। इन ख्यालों ने हमें कितना सताया। कितना डराया। ये सब डायरी में लिखना है। अपने फिजूल के विचारों पर नजर रखने की इससे बेहतर प्रक्रिया और कोई नहीं हो सकती है।
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तो फिर नोटबुक उठाइये और उसमें अलग-अलग सेक्शन बना लीजिये। जैसे कब, कहां, क्यों, चिंता का स्तर। जब आपको पता चलेगा कि विचार दिन में कब और किस जगह आपके दिमाग में घुसा। क्यों वह उस समय ही उपजा और चिंता कितनी बढ़ी या घटी तो फिर आप अपने विचारों को पकड़ना सीखेंगे।
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- फोटो : डायरी लेखन
अब आप इस शरारती विचार को देखिये और आंकलन कीजिये कि इस परेशान करने वाले विचार का कारण दिमाग में पहले से बैठी कोई बात थी या फिर ये चिंता मौजूदा परिस्थिति की देन है।
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ये भी लिखिये कि ये ख्याल आपके दिमाग में कितनी बार आया। फिर लिखिये एक हफ्ते में कितनी बार आया। महीने में कितनी बार ये भी लिख सकते हैं।
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डायरी लिखने के बाद सोचिये कि आखिर अपके दिमाग की भीतरी परत में ऐसी क्या बात छिपी है। जिसने आपके भीतर चिंता पैदा की। कारण मिला? यकीन मानिये ज्यादातर बार ठोस कारण मिलेगा ही नहीं। और मिलेगा भी तो आप महसूस करेंगे की ज्यादातर कारण फिजूल हैं।
मन से निकल जायेगा विचारों का कचरा। आप खाली महसूस करेंगे। रात को सोते समय सुकून आपके दिमाग में तैरेगा, फिजूल के विचार नहीं।
जो विचार आपको चिंता देते थे अब वह बिल्कुल वैसे ही आपके दीमाग से दूर रहेंगे जैसे मार्टिन लगाने के बाद मच्छर कमसे से दूर रहते हैं।