शोध करते वैज्ञानिक
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विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में फ्रीलांस काम के प्रति लोगों का नजरिया बदल जाएगा। फ्रीलांस और शॉर्ट टर्म पर नौकरियों की अधिकता वाली अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। 'शेफ ऑन कॉल' जैसी चीजें सच्चाई में तब्दील हो जाएंगी क्योंकि लोग रेस्तरां जाने से तो बचेंगे लेकिन रेस्तरां के जायके वाले खाने को अपनी रसोई में बनवाना चाहेंगे। ऐसी नौकरियां जिनमें आपको ग्राहकों के साथ काम करना पड़ता है, जैसे सैलून और ब्यूटी पार्लर, घर के काम और साफ-सफाई, फिजियो थेरेपिस्ट, जिम ट्रेनर, कोरियोग्राफर और अभिनेताओं के काम को पहले से ही असुरक्षित माना जा रहा है। कई नौकरियां अब डिजिटल मोड में भी जा रही हैं। मिसाल के तौर पर, योग, डांस और संगीत के ट्रेनर लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो क्लास के जरिए अपना काम कर रहे हैं। एचआर के पेशे में काम करने वाले कुछ लोगों का कहना है कि क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और साइबर सिक्योरिटी जैसी स्किल्स की जानकारी वाले इंजीनियर, डाटा एनालिस्ट और डाटा वैज्ञानिकों की ज्यादा जरूरत पड़ेगी। नौकरियों में ऐसे लोगों की जरूरत पड़ेगी जो भावनात्मक रूप से मजबूत हों और दबाव में काम कर सकें।