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कोरोना काल में अपनाएं ये 5 विचार, जीवन में बहुत आएंगे काम

Wed, 24 Jun 2020 11:09 AM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दुनिया में कोरोना (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
कोरोना वायरस महामारी से दुनियाभर में आम जन-धन की अपूरणीय क्षति हुई है। लेकिन इस महामारी ने हमारी चेतना को जागृत करने का काम किया है। इस महामारी के दौर में फिर से अध्यात्म पर मंथन होता नजर आ रहा है। कोरोना काल में हर सचेत सामाजिक व्यक्ति के मन में चाहे वह किसी भी वर्ग और किसी भी स्तर का हो भावनाओं का बवंडर उठ रहा है। ऐसे में आज हम आपको 5 विचार मंथन के बारे में बताएंगे, जो इस महामारी के दौरान बहुत काम आएंगे। ये मंथन हमें  ये एहसास जरूर कराएंगे कि हमारी आंतरिक खुशी से, अकेलेपन से, हमारी सोच के पुराने पैटर्न्स पर और भावनाओं के बहते समंदर में हमने बहुत कुछ जमा किया है या बहा दिया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
प्रार्थना और ध्यान
कोरना वायरस महामारी में सभी लोग अपने-अपने स्तर पर प्रार्थना और ध्यान लगाना शुरू कर दिया है। चाहे वो ट्वीट करने वाला हो, सेलिब्रिटी हो, विद्यार्थी, मध्यमवर्गीय हो, व्यापारी, कामकाजी वर्ग या महिलाएं सभी ने अपनी दिनचर्या में प्रार्थना-ध्यान को जगह दी है और। सभी लोगों ने जरूरतमंदों की मदद की और मदद करने की इच्छा जताई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
प्रकृति की चिंता
कोरोना वायरस के चेन को तोड़ने के लिए दुनियाभर में लॉकडाउन की व्यवस्था लागू की गई। लॉकडाउन के कारण प्रदूषण जब अपने निम्न स्तर पर था, तो अधिकांश लोगों ने प्रकृति की बेहतरी पर प्रसन्नता जाहिर की। प्रकृति के बेहतर होने से और पशु पक्षियों को स्वतंत्र रूप में देखकर सबलोगों को खुशी महसूस हुई।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भरोसा और सकारात्मकता
इस घातक महामारी के दौर में मन को शांत रखना बोहद जरूरी है। व्यक्ति या समुदाय की बेहतरी करने की सोच तथा कल्याणकारी कार्य करने से प्रेरित ज्यादातर मनुष्य ने सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। ऐसा करने से ये सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग या अकेलेपन की तकलीफ को गौण किया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
संवेदनशीलता
आम नागरिकों को अपने कर्मियों के प्रति संवेदनशील रहने के लिए समाजसेवी संस्थाओं ने प्रेरित किया। इसमें घर में काम करने वाले कर्मियों को वेतन देना साथ ही उनके दुख को समझना और उसमें शामिल होना आदि रहा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्षमता की पहचान
इस महामारी के दौरान उच्च वर्ग से लेकर मध्यम वर्ग तक के लोगों ने ये माना कि उन सभी में वह क्षमताएं हैं जो कि उनके हर कार्य को सामंजस्यता के करीब ले जा रही हैं। कोरोना महामारी के वजह से व्यक्ति ने अपनी असामान्य क्षमता को पहचाना है।
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