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Navratri 2022: नवरात्रि में होती है मां के 9 रूपों की पूजा, जानिए सभी के बारे में

Sat, 02 Apr 2022 07:07 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नवरात्रि 2022 - फोटो : amar ujala
Chaitra Navratri 2022 : इस बार 2 अप्रैल 2022 को चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हुई है। हिंदू धर्म के मुताबिक, साल में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, हालांकि इनमें शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। नवरात्रि नौ दिनों का पर्व है। इन नौ दिनों में नवदुर्गा की पूजा होती है। देवी शक्ति के नौ स्वरूप हैं। इन सभी नौ स्वरूपों की नवरात्रि के मौके पर हर दिन खास पूजा की जाती है। लोग उपवास रखते हैं और माता के हर स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए मंत्र उच्चारण और पाठ करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि माता के वह नौ स्वरूप कौन से हैं। इन नवदुर्गा के नाम क्या है और उनसे जुड़े रहस्य क्या हैं? नवरात्रि में किस दिन माता के कौन से स्वरूप की पूजा की जाती है? इस साल नवरात्रि का पर्व मनाने से पहले माता के सभी अलग अलग स्वरूपों, उन के नाम से जुड़े रहस्य और नवदुर्गा से जुड़ी मान्यताओं व कथा के बारे में जान लें। 
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शैलपुत्री - फोटो : amar ujala
पहला स्वरूप -माता शैलपुत्री

नवरात्रि के प्रथम दिन माता के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां पार्वती को शैलपुत्री के नाम से भी जाना जाता है। पर्वतराज हिमालय के घर पर जन्म लेने के कारण मां पार्वती को शैलपुत्री कहा जाता है। शैल का शाब्दिक अर्थ पर्वत होता है।
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ब्रह्मचारिणी - फोटो : amar ujala
दूसरा स्वरूप- ब्रह्मचारिणी

माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए वर्षों कठोर तप किया था। इस कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम मिला। ब्रह्मचारिणी का अर्थ है कठोर तपस्या का आचरण करने वाला।

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मां चंद्रघंटा - फोटो : amar ujala
तीसरा स्वरूप- चंद्रघंटा

मां पार्वती के मस्तक पर अर्ध चंद्रमा के आकार का तिलक लगा रहता है, इस कारण उनका एक स्वरूप चंद्रघंटा कहलाता है।
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मां कुष्मांडा - फोटो : amar ujala
चौथा स्वरूप- कूष्मांडा

मां आदिशक्ति ने अपने भीतर उदर से अंड तक ब्रह्मांड को समेट रखा है। उनमें पूरे ब्रह्मांड को उत्पन्न करने की शक्ति है, इसलिए उन्हें माता कुष्मांडा के नाम से भी जाना जाता है।
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मां स्कंदमाता - फोटो : amar ujala
पांचवा स्वरूप- स्कंदमाता

माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय जी को स्कंद के नाम से भी जाना जाता है। इस कारण मां पार्वती को स्कंद माता भी कहते हैं।
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मां कात्यायनी - फोटो : amar ujala
छठा रूप- कात्यायनी

महिषासुर नामक अत्याचारी दैत्य का वध करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ने मिल कर अपने तेज से माता को उत्पन्न किया था। देवी के प्रकट होने के बाद सबसे पहले उनके पूजा महर्षि कात्यायन ने की थी। इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा।

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मां कात्यायनी - फोटो : amar ujala
सातवां स्वरूप- कालरात्रि

संकट हरने के लिए माता के कालरात्रि स्वरूप का जन्म हुआ। संकट को काल भी कहते हैं, हर तरह के काल का अंत करने वाली मां कालरात्रि कहलाती हैं। उनके पूजन से सभी संकटों का नाश होता है।

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महागौरी - फोटो : amar ujala
आठवां स्वरूप- महागौरी

भगवान शिव की अर्धांगिनी बनने के लिए माता गौरी ने वर्षों तक इतना तप किया था कि वह काली पड़ गई थीं। बाद में महादेव ने उनके तप से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी स्वीकार कर लिया था। उसके बाद भोलेनाथ ने माता गौरी को गंगाजी के पवित्र जल से स्नान कराया। मां गंगा के पवित्र जल से स्नान के बाद माता का शरीर बहुत गोरा और अद्भुत कांतिमान हो उठा, तब उसे उनका नाम महागौरी हो गया।
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नवदुर्गा- सिद्धिदात्रि - फोटो : amar ujala
नौवां स्वरूप- सिद्धिदात्री

माता का नौवां स्वरूप सिद्धिदात्री है। वह भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती है। इस कारण उन्हें सिद्धिदात्री कहते हैं। मान्यता है कि माता के इस स्वरूप की पूजा करने से सभी देवियों की उपासना हो जाती है। 
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