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Bhupendra Singh Death: कभी करते थे संगीत से नफरत, फिर कैसे बने इतने बड़े गायक? जानिए भूपिंदर सिंह के जीवन की दास्तां

Mon, 18 Jul 2022 11:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भूपिंदर सिंह का निधन - फोटो : Twitter
मशहूर गजल गायक भूपिंदर सिंह का सोमवार देर शाम को निधन हो गया। भारतीय संगीत की दुनिया के लिए यह एक बड़ी क्षति है। भूपिंदर सिंह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, हालांकि सोमवार देर शाम उन्होंने आखिरी सांस ली। खनकती आवाज और गाने का अनोखा अंदाज भूपिंदर सिंह  की अलग पहचान थी। उनके गाए कई गीत-गजल वर्षों तक जीवंत रहेंगे। होके मजबूर मुझे उसने बुलाया होगा, नाम गुम जाएगा, दिल ढूंढ़ता है फिर वही, जैसी गजलों को आवाज देने वाले भूपिंदर सिंह  की एक खास फैन फॉलोइंग थी।

6 फरवरी, 1940 को अमृतसर में जन्मे भूपिंदर सिंह का जीवन कई तरह के उतार-चढ़ाव वाला था। भूपिंदर सिंह को शुरुआती दिनों में संगीत से नफरत हुआ करती थी, अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में परफॉर्म करके किया। यहां से वह देश को महान गजल गायक कैसे बने, आइए इस बारे में जानते हैं।
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गजल गायक भूपिंदर सिंह - फोटो : Twitter
संगीत से नफरत वाली कहानी

पहले बात करते हैं उनके संगीत से नफरत वाली कहानी की। भूपिंदर सिंह को संगीत उनके पिता प्रोफेसर नत्था सिंह ने सिखाया। उनके पिता स्वयं एक बेहतरीन संगीतकार थे, हालांकि वह इस बात को लेकर बड़े सख्त थे कि मौसिकी सीखने वाला शिष्य गंभीर हो। उनकी इसी सख्ती की वजह से  भूपेंद्र को संगीत से ही चिढ़ होने लगी थी, हालांकि जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनके भीतर संगीत के प्रति प्रेम जगा और वह देश के विख्यात गजल गायकों में शुमार हुए।
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भूपिंदर सिंह गजल की दुनिया का बड़ा नाम - फोटो : Twitter
म्यूजिक डायरेक्टर मदन मोहन ने पहचाना 'हीरा'

गायक बनने के सफर की शुरुआत हुई म्यूजिक डायरेक्टर मदन मोहन की नजर से। मदन मोहन ने एक कार्यक्रम के दौरान भूपिंदर सिंह को गाते हुए सुना, उन्हें भूपिंदर सिंह की कला खूब भाई। इसी का परिणाम मिला और जल्द ही भूपिंदर सिंह को मदन मोहन की तरफ से गाने के लिए बुलावा भेजा गया।

पहले ही मौके में भूपिंदर सिंह को मोहम्मद रफी, तलत महमूद और मन्ना डे के साथ गाने का अवसर मिला। फिल्म हकीकत के गाने 'होके मजबूर उसने मुझे बुलाया होगा' को भूपिंदर सिंह ने आवाज दी, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया और यहीं से उनका संगीत की दुनिया में परचम लहराना शुरू हआ।
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सिंगर भूपिंदर सिंह - फोटो : social media
गाने जो हमेशा दिलाते रहेंगे याद

भूपेंद्र सिंह की आवाज दी गई कई बेहतरीन नगमें हमेशा लोगों के कानों को सुख देते रहेंगे।  ‘नाम गुम जाएगा’, ‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता’, ‘दरो-दीवार पे हसरत से नजर करते हैं’, ‘खुश रहो अहले-वतन हम तो सफर करते हैं’ जैसे गाने गुनगुनाते समय हमेशा भूपिंदर सिंह की याद आती रहेगी। ‘मेरी आवाज ही पहचान है’ गाने को भी भूपिंदर सिंह ने आवाज दी थी, वही आवाज असल में इस महान कलाकार की पहचान है। 
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