भगत सिंह
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भगत सिंह
भारत की आजादी में अगर अपनी जान की कुर्बानी देने वाले शहीदों का नाम याद किया जाएगा तो भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस और न जाने कितने नायकों की कहानी का जिक्र कहना होगा। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। एक ओर गांधी जी अहिंसा से देश को आजादी दिलाने के लिए आंदोलन कर रहे थे। तो वहीं भारतीयों पर होने वाले लाठीचार्ज, असम्मान, अंग्रेजों की गालियों, जलियांवाला कांड जैसे कई मामलों को लेकर देश के एक वर्ग का खून उबल रहा था। उन्हीं में शामिल थे भगत सिंह।
जब साइमन कमिशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज में हत्या कर दी गई तो भगत सिंह समेत हर युवा आक्रोश में था। भगत सिंह ने ठान लिया कि अंग्रेजों को इसका जवाब देना होगा। भगत सिंह ने एक साथी के साथ ब्रिटिश सरकार की असेंबली में बम विस्फोट कर दिया। इस विस्फोट का मकसद पूरी अंग्रेजी हुकूमत तक आजादी की लड़ाई की दमदार आवाज से हिला देना था। इस मामले में उन्हें जेल हुई, जहां से आजादी की जंग को और तेज कर दिया। घर-घर में अपनी आवाज पहुंचाई। अंग्रेजी हुकूमत भगत सिंह और उनके जैसे ही आजादी की मांग को लेकर अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की आग में जलते नौजवानों से डर गए और भगत सिंह व उनके दो साथियों राजगुरु और सुखदेव को फांसी दे दी। फांसी के समय भी भगत सिंह और उनके साथियों के चेहरे पर डर या दुख नहीं बल्कि मुस्कान थी।