प्रतीकात्मक तस्वीर
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त्योहार के दौरान एक अन्य सर्वे
प्रोफेसर केटलिन वूली ने बताया कि हमने अध्ययन के दौरान जब बिना किसी डाइट प्लान के खाना खाने वाले लोगों को सीमित मात्रा में खाने को कहा, तो पाया कि ऐसे हालात में उनके अंदर अकेलेपन की भावना ज्यादा बढ़ गई। इसके बाद हमने त्योहार के दौरान भी ऐसा ही एक सर्वे किया। सर्वे के दौरान हमने जब लोगों को बार-बार सीमित मात्रा में खाने की बात याद दिलाई, तो वे अपने खाने का लुत्फ नहीं उठा पाए और खुद को अकेला महसूस करने लगे। इतना ही नहीं इस दौरान खाने को लेकर लोगों में चिंता भी बढ़ गई और उन्होंने महसूस किया कि त्योहार में बेफिक्र होकर खाना न खा पाने पर लोग उनके बारे में पता नहीं क्या सोचते होंगे। स्कूली बच्चों के मुकाबले अविवाहित और कम कमाई करने वाले व्यस्कों में ऐसी भावनाएं कुछ ज्यादा पाई गईं।