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पसंद का खाना नहीं खा पाने से भी बढ़ता है अकेलापन, खुद को तन्हा महसूस करते हैं लोग: रिसर्च

Sat, 11 Jan 2020 01:08 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
किसी भी त्योहार या खास मौकों पर घरों में कई तरह के पकवान बनते हैं। विश्व के हर देश और वहां के भिन्न-भिन्न जगहों पर कई प्रकार की खाने की चीजें बनाई जाती हैं। हालांकि कई ऐसे लोग हैं जो चाहते हुए भी भरपूर भोजन नहीं कर सकते हैं। डाइट प्लान और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ऐसे लोग जमकर खाना नहीं खा पाते हैं। सीमित मात्रा में खाना खाने वाले लोग चाहते हुए भी अपने पसंदीदा पकवान का लुत्फ नहीं उठा पाते हैं जिस वजह से ऐसे लोगों को अकेलेपन का अहसास करने लगते हैं। इस बात का खुलासा हाल ही में हुए एक रिसर्च में हुआ है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
इस नई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो लोग अपने पसंदीदा खाना नहीं खा पाते हैं उनके जीवन में अकेलेपन की समस्या बढ़ने लगती है। यह रिसर्च अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी द्वारा किया गया है जिसके नतीजे जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केटलिन वूली के अनुसार डाइट प्लान के आधार पर खाना खाने वाले लोग जब भी किसी पार्टी में होते हैं, तो शारीरिक रूप से तो वहां माैजूद तो होते हैं लेकिन खाने की टेबल पर दूसरों के साथ बॉन्डिंग नहीं कर पाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
खाने को लेकर यह अकेलापन बच्चों और बड़ों दोनों में पाया जाता है। डाईट प्लान के हिसाब से खाने वाले लोग हमेशा कैलोरीज को ध्यान में रखकर सीमित मात्रा में खाना खाते हैं और यही उधेड़बुन उन्हें दूसरों से अलग और अकेला कर देती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
डाइट प्लान की फिक्र
प्रोफेसर केटलिन वूली कहते हैं कि बच्चों में डाइट प्लान की फिक्र कम रहती है, क्योंकि बचपन में चीजों की परवाह न करना थोड़ा आसान रहता है। हालांकि वयस्क लोग खानपान को लेकर ज्यादा फिक्रमंद रहते हैं। इस रिसर्च में यह बात सामने आई कि कुछ खास चीजों के खाने पर प्रतिबंध लगाने से लोगों में अकेलेपन की भावनाएं 19 फीसदी ज्यादा बढ़ी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
त्योहार के दौरान एक अन्य सर्वे
प्रोफेसर केटलिन वूली ने बताया कि हमने अध्ययन के दौरान जब बिना किसी डाइट प्लान के खाना खाने वाले लोगों को सीमित मात्रा में खाने को कहा, तो पाया कि ऐसे हालात में उनके अंदर अकेलेपन की भावना ज्यादा बढ़ गई। इसके बाद हमने त्योहार के दौरान भी ऐसा ही एक सर्वे किया। सर्वे के दौरान हमने जब लोगों को बार-बार सीमित मात्रा में खाने की बात याद दिलाई, तो वे अपने खाने का लुत्फ नहीं उठा पाए और खुद को अकेला महसूस करने लगे। इतना ही नहीं इस दौरान खाने को लेकर लोगों में चिंता भी बढ़ गई और उन्होंने महसूस किया कि त्योहार में बेफिक्र होकर खाना न खा पाने पर लोग उनके बारे में पता नहीं क्या सोचते होंगे। स्कूली बच्चों के मुकाबले अविवाहित और कम कमाई करने वाले व्यस्कों में ऐसी भावनाएं कुछ ज्यादा पाई गईं।
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