Workplace Networking: वर्कप्लेस पर सफलता के लिए नेटवर्क बनाना जरूरी है, लेकिन नए पेशेवर अक्सर इसमें अपनी पहचान खो बैठते हैं। सही तरीका यह है कि नजरिये में बदलाव लाएं, लोगों से खुलकर जुड़ें, लेकिन अपनी असल पहचान और मूल्यों को बनाए रखें।
Workplace Networking: अपने लोगों को यह कहते सुना होगा कि करिअर में बेहतर अवसरों की पहचान करने के लिए तगड़ी नेटवर्किंग का होना बेहद जरूरी है। हालांकि, ऐसा करना आसान नहीं है, खासकर तब, जब आप कॉलेज से निकलकर सीधे कॉरपोरेट जगत में दाखिल होते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि दोनों जगहों के तौर-तरीके बिल्कुल अलग होते हैं। चूंकि, नेटवर्क बनाने की शुरुआत कॉलेज से ही हो जाती है, फिर भी छात्रों को नेटवर्किंग एक भूल भुलैया जैसी लगती है।
ऐसे में, नेटवर्किंग के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, ताकि वे कॉरपोरेट जगत में फिट बैठ सकें। इन चुनौतियों को 'नेटवर्किंग पैराडॉक्स' कहा जाता है। ये ऐसी उलझनें होती हैं, जिनका सामना नए पेशेवरों या छात्रों को अक्सर करना पड़ता है।
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कोड-स्विचिंग से बचें
कार्यस्थल पर आपका नए लोगों के साथ उठना-बैठना होता है। चूंकि, आप अभी-अभी कॉलेज से निकलकर आए हुए होते हैं, तो आप संस्थान के ड्रेसिंग कोड या अन्य कायदे-कानूनों को लेकर थोड़ा असहज महसूस कर सकते हैं। ऐसे में, आप अपने व्यक्तित्व को छिपाने की कोशिश करते हैं और वहां के तौर-तरीकों को अपनाने लगते हैं। इसे 'कोड-स्विचिंग' कहा जाता है।
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यह प्रक्रिया दोधारी तलवार की तरह होती है, जो एक तरफ तो आपको कार्यस्थल में टिकने और आगे बढ़ने में मदद करती है. वहीं दूसरी ओर यह आपकी असली पहचान को दवा देती है। इससे बचने के लिए धीरे-धीरे अपने असली स्वरूप को सामने लाएं। लोगों से आप अपने बारे में उतनी ही बातें साझा करें, जितनी आप सुरक्षित और सहज महसूस करें।
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अपनी कीमत पहचानें
कॉरपोरेट जगत में कमान अक्सर उन्हों के हाथों में होती है, जिनका पहले से क्षेत्र में दबदबा होता है या कई वर्षों का अनुभव होता है। यही लोग तय करते हैं कि कौन नौकरी के अवसरों, मेटरशिप या प्रमोशन का लाभ ले सकता है। ऐसे में, नए पेशेवरों के लिए प्रभावशाली नेटवर्क बनाना और उसमें शामिल हो पाना मुश्किल हो जाता है।
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इस स्थिति को 'गेटकीपर पैराडॉक्स' कहते हैं। इससे निजात पाने के लिए आपको खुद की अहमियत पहचाननी होगी। जब आप अपनी ताकत को समझ जाएंगे, तो अपने आप आत्मविश्वास के साथ लोगों से जुड़ पाएंगे और खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश करेंगे, जिसकी कंपनी को जरूरत है।
कई बार पेशेवर नेटवर्क बनाते समय आप ऐसे लोगों से जुड़ते हैं, जिनका साथ आपको अच्छा लगता है। ऐसा करने से आपकी विविधता और रचनात्मकता सीमित हो जाती है और आप नए विचार, अवसर और विकास से वंचित रह जाते हैं। इसे 'प्रॉक्सिमिटी पैराडॉक्स' कहा जाता है।
इसका इलाज है कि आप अपने ऐसे लोगों से जुड़ें, जो आपको ईमानदार सलाह, सहयोग और समर्थन दे सकें। इसमें मेंटर, दीस्त, मैनेजर, किसी विषय के एक्सपर्ट और कोई ऐसा व्यक्ति भी हो सकता है, जो आपको नए अवसरों से जोड़ सके।