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Self-care: दिनभर की भागदौड़ में थकान महसूस हो तो खुद को करें रिचार्ज, अपने भीतर झांकें और स्वयं को करें महसूस

Wed, 29 Oct 2025 04:08 PM IST
शाहीन परवीन गॉर्डन एम. सेयर, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू

सार

Mindfulness: तेज रफ्तार जिंदगी में खुद को समय देना ज़रूरी है। जब थकान महसूस हो, तो ठहरकर अपने भीतर झांकें - यही आत्म-चिंतन आपको फिर से ऊर्जा और संतुलन देता है।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
Self-care: क्या आपके साथ अक्सर ऐसा होता है कि दिन भर काम, मीटिंग्स और अन्य जिम्मेदारियों की वजह से हुई थकावट के बावजूद जबरन आपको टीम के सामने उत्साह दिखाना पड़ता है? चूंकि, आप अंदर से बेहद थके हुए होते हैं, इसलिए अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते और आपको बनावटी बर्ताव करने का दिखावा करना पड़ता है। ऐसे में, दिन के आखिर तक आप ऊर्जा-रहित महसूस करने लगते हैं। 

अगर यह पैटर्न आपके साथ बार-बार हो रहा है, तो यह संकेत है कि आप सतही तौर पर काम करने के कुचक्र में फंस चुके हैं। इससे बाहर निकलने के लिए जरूरी है कि आप भावनाओं को दबाने की बजाय खुद को फिर से रिचार्ज करें। इससे न केवल उत्पादकता बढ़ती है, बल्कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने का साहस भी मिलता है। ऐसा करने के कुछ व्यावहारिक तरीके हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

ईमानदार बने रहें

जब आप टीम से जुड़ाव महसूस नहीं करते या आपको दूरियों का एहसास होता है, तो आप न चाहते हुए भी बनावटी व्यवहार करने का दिखावा करने लगते हैं। ऐसे में, टीम के बाकि सदस्य समझ जाते हैं कि आपका बर्ताव ईमानदार नहीं है, जिससे रिश्तों की गहराई कम हो जाती है। इसलिए, जरूरी है कि आप खुद को थोड़ा वक्त दें। 

इसके बाद लोगों से पूरी ऊर्जा के साथ व सच्चे मन से जुड़ने की कोशिश करें। किसी पसंदीदा इन्सान से बातें करना, किताब पढ़ना, संगीत सुनना या प्रकृति का आनंद लेना आदि छोटी-छोटी गतिविधियां इसमें फायदेमंद हो सकती हैं। इससे आप पूरे जोश और ऊर्जा के साथ दोबारा टीम के लोगों से जुड़ सकेंगे और दिखावटी व्यवहार करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

खुद को तरोताजा रखें

बेशक, लीडर्स के पास हमेशा आराम करने का वक्त नहीं होता, लेकिन कुछ मिनट का छोटा-सा ब्रेक ही काफी होता है। कई लोग सोचते हैं कि थकान के बावजूद काम करते रहना सही है, पर असल में 'माइक्रो-ब्रेक' लेना सेहत व काम, दोनों के लिहाज से बेहतर है।

पांच मिनट का ब्रेक, जैसे गहरी सांस लेना, स्ट्रेचिंग करना, थोड़ी देर टहलना, खूबसूरत नजारे देखना या किसी से हंसी-मजाक करना दिल और दिमाग, दोनों को तरोताजा कर देता है। ऐसे छोटे ब्रेक लेने से ऊर्जा बढ़ती है और आप दिन भर बेहतर ढंग से काम कर पाते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

हर स्थिति को नए नजरिये से देखें

अपनी भावनाओं को पहचानना और समझना जरूरी है, क्योंकि इससे आप हर स्थिति को नए नजरिये से देख सकते हैं, जैसे टीम के सवालों को उनकी रुचि और समर्पण का संकेत मानना। इससे आपके अंदर सहानुभूति और समझ, दोनों बढ़ती हैं और बातचीत भी ज्यादा सकारात्मक होती है।

सच्ची भावनाएं साझा करना भी लाभदायक होता है, क्योंकि यह आपको एक ईमानदार और मानवीय लीडर के रूप में पेश करता है। इससे टीम में भरोसा व जुड़ाव गहराता है। यह बर्नआउट के चक्र को तोड़ने का भी अच्छा तरीका है।
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