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जेनेटिक इंजीनियरिंग में है सुनहरा भविष्य, जल्द ही इस क्षेत्र में निकलेंगी बंपर नौकरियां

Sun, 04 Nov 2018 01:41 PM IST
रिचर्ड ग्रे बीबीसी कैपिटल
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genetic engineering
ब्रिटेन की सरकार का अनुमान है कि 2030 तक अकेले ब्रिटेन में जीन और सेल थेरेपी से 19 हजार से ज्यादा नई नौकरियां पैदा होंगी। अमरीका के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने बायोमेडिकल इंजीनियरों की नौकरी में 7 फीसदी और मेडिकल साइंटिस्ट की नौकरी में 13 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। दोनों को मिलाकर करीब 17 हजार 500 नौकरियां पैदा होंगी।
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प्रयोगशालाओं से अलग भी लोगों की जरूरत होती है। इनमें वे लोग भी शामिल होते हैं जो मरीजों के जीनोम और उनके इलाज से जुड़े डेटा को संभालने में मदद करते हैं। अमरीकन सोसाइटी ऑफ जीन एंड सेल थेरेपी की प्रमुख और स्टैंनफोर्ड यूनिवर्सिटी में जेनेटिक्स की प्रोफेसर मिशेल कैलॉस कहती हैं, "जीन थेरेपी चिकित्सा अनुसंधान और विकास उद्योग का एक स्वीकार्य और बढ़ता हुआ हिस्सा बन रहा है।"
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"जीन थेरेपी की स्थापित और नई कंपनियों के विकास के साथ नौकरियां भी बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि इन कंपनियों को विस्तार के लिए नये वैज्ञानिकों की भर्ती करनी होगी।" "जीन थेरेपी इंडस्ट्री को जेनेटिक्स, मेडिसिन, मोलेक्युलर बायलॉजी, वायरोलॉजी, बायो-इंजीनियरिंग और केमिकल इंजीनियरिंग जैसे वैज्ञानिक विषयों के साथ बिजनेस ग्रैजुएट्स की भी ज़रूरत होती है।"

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जीन संपादन को मिल रहे प्रचार का प्रमुख कारण उन आनुवंशिक दोषों को ठीक करने की इसकी क्षमता है, जिनका अब तक कोई इलाज नहीं था, जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस और हेमोफीलिया। कई प्रमुख दवा कंपनियां यह मानकर चल रही हैं कि आने वाले दिनों में यह हेल्थकेयर का अहम औजार बनेगी। कुछ अनुमानों के मुताबिक, जीनोम संपादन का वैश्विक बाजार 5 साल में 2017 के स्तर से दोगुना होकर 6.28 अरब डॉलर या 4.84 अरब पाउंड तक पहुंच जाएगा।
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इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन की सरकार ने एलान किया कि नये इलाज के विकास में तेज़ी लाने के लिए वह एक नये सेल एंड जीन थेरेपी मैन्युफैक्चरिंग सेंटर में 6 करोड़ पाउंड (7.6 करोड़ डॉलर) का निवेश कर रही है। अमरीका में नेशनल ह्यूमन जीनोम रिसर्च इंस्टीट्यूट ने भविष्यवाणी की है कि इस विकास के साथ कर्मचारियों की मांग में खासी बढ़ोतरी होगी। कैंसर, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों के इलाज के लिए करीब 2700 क्लीनिकल परीक्षण हैं, जिनमें जीन थेरेपी का उपयोग होता है या जिनमें इसके उपयोग की अनुमति मिल चुकी है।
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ऐसे परीक्षण करने वाली छोटी जीन थेरेपी कंपनियों ने बेयर, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन, फ़ाइज़र, मर्क और नोवार्टिस समेत कई बड़ी दवा कंपनियों के साथ साझेदारी की है या उन्हें ऐसी कंपनियों से निवेश मिला है। भर्ती वेबसाइटों पर एक नज़र डालने से पता चलता है कि इन दवा कंपनियों में से ज़्यादातर कंपनियां अपने लिए भी जीन थेरेपी वैज्ञानिकों की भर्ती कर रही हैं। कुशल कामगारों की मांग बढ़ने का एक कारण यह है कि अस्पतालों में जीन थेरेपी संभव हो रही है और इसके लिए कई तरह की विशेषज्ञता की ज़रूरत पड़ने वाली है।
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लंदन के फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट की रिसर्चर ग्यून्स टेलर कहती हैं, "यह वास्तव में बहु-विषयक क्षेत्र है।" वह यौन गुणसूत्रों के अध्ययन के हिस्से के रूप में जीन संपादन तकनीक का उपयोग कर रही हैं। इससे प्रजनन समस्याओं या रोकिटांस्की सिंड्रोम जैसे विकास संबंधी यौन विकारों के इलाज में मदद मिल सकती है, जिनमें लड़कियां गर्भाशय के बिना जन्म लेती हैं। टेलर कहती हैं, "हमें मोलेक्युलर साइंटिस्ट, इंजीनियर और कंप्यूटर साइंटिस्ट चाहिए जो नये आनुवंशिक तकनीकों से पैदा हुए भारी-भरकम डेटा को समझने में मदद कर सकें."

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इस क्षेत्र में मिलता है योग्यता के अनुसार वेतन-

वैज्ञानिकों का वेतन उनके काम के लिए ज़रूरी योग्यता पर निर्भर करता है, फिर भी उच्च कौशल स्तर के कारण उसके औसत से ज़्यादा होने की संभावना है। उदाहरण के लिए, नेशनल ह्यूमन जीनोम रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक जेनेटिक साइंटिस्ट को सालाना 39,870 से 134,770 अमरीकी डॉलर के बीच वेतन मिल सकता है, जबकि आनुवंशिक डेटा को समझने में मददगार जैव-सूचना विश्लेषक को सालाना 35,620 डॉलर से 101,030 डॉलर के बीच सैलरी मिल सकती है।

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टेलर कहती हैं, "जीन संपादन को बहुत प्रचार मिला है. इनमें से अगर थोड़े भी सफल हो जाते हैं तो रिसर्च कर रहे बहुत से लोग इससे जुड़ जाएंगे। इलाज शुरू होने पर क्लीनिक में डॉक्टरों और एस्थेटिस्ट की भी ज़रूरत होगी।" टेलर एक नये और शक्तिशाली जीन संपादन उपकरण सीआरआईएसपीआर-कास9 (CRISPR-Cas9) का प्रयोग करती हैं, जो अन्य जीवों में जीन संपादन के लिए बैक्टीरिया की रक्षा प्रणाली के एक हिस्से का उपयोग करता है। पांच साल पहले बनाए गए उपकरण ने जीन संपादन की गति और लागत दोनों को बदल दिया है। इससे वैज्ञानिकों को हानिकारक जीन्स को खत्म करने और डीएनए को तोड़कर वहां नये जीन्स घुसाने में सहूलियत हुई है. इसने बीमारियों के लिए दोषी जीन्स की पहचान करने के रिसर्च को भी बढ़ावा दिया है।

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जीन संपादन की संभावनाएं-

कई बीमारियां सिर्फ़ दोषी जीन्स को खत्म करने से ठीक नहीं होतीं, लेकिन सीआरआईएसपीआर-कास9 ने मरीजों के इलाज के नये रास्ते खोले हैं और अन्य स्थितियों से निपटने के तरीके भी सुझाए हैं। टेलर कहती हैं, "मोलेकुलर जीव वैज्ञानिक होने के लिए यह रोमांचकारी समय है. मैं जब 15 साल की थी तभी से वैज्ञानिक बनना चाहती थी. संयोग से मैं जीन संपादन पर काम कर रही हूं। ऐसा भी होता है कि प्रयोगशाला में मैं कई दिनों तक एक ही काम दोहराती रहूं, लेकिन हर दिन नया होता है और यह मुझे कुछ बड़े प्रश्नों के उत्तर ढूंढने में मदद करता है।" जीन संपादन की संभावनाएं हकीकत में कितना बदल पाती हैं, यह आने वाले वर्षों के नियामक वातावरण पर निर्भर करेगा।

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किसी व्यक्ति के डीएनए को बदलने के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में बहुत कुछ पता नहीं है। उदाहरण के लिए, अनिच्छित बदलाव कोशिकाओं को कैंसरकारक बना सकते हैं। यदि मरीज का शरीर नये जीन को ना स्वीकारे तो शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं शुरू हो सकती हैं। कुछ नैतिक मुद्दे भी हैं जो अंडाणु और शुक्राणु कोशिकाओं के जीन्स संपादन से जुड़े हैं। यह आनुवंशिक बीमारियों से लड़ने में काम आ सकते हैं, लेकिन इसमें आंखों के रंग या लंबाई जैसे अन्य लक्षणों के बदल जाने की संभावना रहती है।यही कारण है कि यूरोप जैसी जगहों पर पौधों, जानवरों और इंसानों का जीन संपादन बहुत ही ज़्यादा नियंत्रित है। अमरीका में कुछ क्लीनिकल परीक्षणों के लिए नियमों में थोड़ी ढ़ील दी गई है। चीन फिलहाल जीन संपादन के क्षेत्र में अग्रणी है। इस साल की शुरुआत में पता चला कि इसने कई स्थितियों में 300 मरीजों पर सीआरआईएसपीआर-कास9 के प्रयोग वाले क्लीनिकल परीक्षण की मंजूरी दे दी है। चीन में वैज्ञानिकों ने कैंसर और एचआईवी के 86 मरीजों के इलाज में इस तकनीक का प्रयोग किया है।

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जेनेटिक सलाहकार

चीन में जीन थेरेपी के कई अग्रणी वैज्ञानिकों ने विदेश में प्रशिक्षण लिया है, लेकिन वे अब चिकित्सा के नये छात्रों को अपने ही देश में सीआरआईएसपीआर जैसी तकनीक के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दे रहे हैं। चीन सरकार ने नई पंचवर्षीय योजना में जीन संपादन को प्रमुखता दी है। इसमें रिसर्च पर अरबों डॉलर खर्च किए जाएंगे। लेकिन जैसे ही मरीजों का जीन संपादन शुरू हो रहा है, कुछ लोग जीवन देने वाले कोड में बदलाव के विचार से असहज हैं। वंशानुगत बीमारियों के इलाज में जेनेटिक्स के प्रयोग ने एक और रोज़गार को तेज़ी से बढ़ाया है, जिसका कुछ साल पहले अस्तित्व भी नहीं था। यह है जेनेटिक सलाहकार।
यूरोपीयन सोसाइटी फॉर ह्यूमन जेनेटिक्स की वाइस प्रेसिडेंट और जेनेटिक सलाहकार क्रिस्टीन पैच कहती हैं, "मरीजों और चिकित्सा कर्मचारियों को जेनेटिक्स से जुड़े कठिन फ़ैसले लेने होंगे, इसलिए उन्हें उपलब्ध कराई गई सूचनाओं की व्याख्या करने में मदद की ज़रूरत होगी।"
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विशेषज्ञों की भूमिका बढ़ेगी

अमरीका के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने जेनेटिक सलाहकारों को 20 सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली नौकरियों में शामिल किया है। ब्यूरो का अनुमान है कि 2026 तक जेनेटिक सूचनाओं की व्याख्या करने, चिकित्सा कर्मचारियों को सलाह देने और मरीजों को सही फ़ैसले लेने में मदद करने वाले विशेषज्ञों की नौकरियां 29 फीसदी बढ़ेंगी। पैच कहती हैं, "जीन थेरेपी में मरीजों के लिए कुछ मुश्किल विकल्प जुड़ने जा रहे हैं। उन्हें किसी भी दूसरे इलाज की तरह इससे जुड़े जोखिम पर विचार करने की आवश्यकता होगी।"
"उन्हें यह समझने में सक्षम होना होगा कि इससे क्या-क्या जुड़े हुए हैं। स्वास्थ्य सेवा के पेशेवरों को भी अपने आनुवंशिकी ज्ञान को बढ़ाने की ज़रूरत होगी और इसमें विशेषज्ञता रखने वाले लोगों की भूमिका बढ़ेगी।"
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