Staff Selection Commission: राज्य स्कूल सेवा आयोग मुख्यालय का घेराव कर रहे बेरोजगार शिक्षकों के प्रदर्शन ने आखिरकार 40 घंटे बाद दम तोड़ा, जब उन्होंने आयोग के अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार को कार्यालय से बाहर जाने की इजाजत दी। यह घेराव 2016 की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर किया गया था, जिसकी सुनवाई अब कलकत्ता हाईकोर्ट में होनी है।
SSC: राज्य स्कूल सेवा आयोग (SSC) मुख्यालय का घेराव कर रहे प्रदर्शनकारी बेरोजगार शिक्षकों के एक समूह ने 40 घंटे बाद आयोग के अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार को कार्यालय से बाहर जाने दिया।
मजूमदार को 2016 एसएससी भर्ती परीक्षा की ओएमआर शीट पेश करने से संबंधित सुनवाई के सिलसिले में बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में पेश होना है।
हालांकि, 21 अप्रैल को दोपहर 2 बजे से प्रदर्शन शुरू करने वाले आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका धरना जारी रहेगा।
पीटीआई से बात करते हुए मजूमदार ने कहा कि वह घर लौट आए हैं और निर्धारित समय पर अदालती कार्यवाही में शामिल होने से पहले कुछ समय आराम करेंगे।
योग्य शिक्षक फोरम से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि मजूमदार को इसलिए जाने दिया गया क्योंकि उन्हें अदालत में शारीरिक रूप से उपस्थित होना था और साथ ही स्वास्थ्य आधार पर उन्हें कारावास से कुछ राहत भी दी गई थी।
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Protesting Jobless Teacher
- फोटो : PTI
उन्होंने कहा, "हमारा धरना हमेशा की तरह जारी रहेगा... अदालती कार्यवाही के बाद मजूमदार के कार्यालय लौटने पर उनका फिर से घेराव किया जाएगा।"
कलकत्ता उच्च न्यायालय बुधवार को पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें दावा किया गया है कि उसने 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की ओएमआर शीट अपलोड नहीं की है, जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद अपनी नौकरी खो दी थी।
लगभग 2,000 बेरोजगार शिक्षकों ने 21 अप्रैल को एसएससी मुख्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। इसी दिन आयोग ने 2016 की परीक्षाओं के लिए दागी और पात्र उम्मीदवारों की सूची अपलोड करने का वादा किया था, लेकिन कानूनी मुद्दों का हवाला देते हुए ऐसा नहीं कर सका।
शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को एसएससी अध्यक्ष से मुलाकात की और चर्चा की, जिसे उन्होंने "आंशिक रूप से संतोषजनक" बताया।
योग्य शिक्षक फोरम के प्रवक्ता चिन्मय मंडल ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया, "हम 17,206 शिक्षकों की सूची से आंशिक रूप से संतुष्ट हैं, जिनमें से 15,403 पात्र हैं, जैसा कि एसएससी ने पुष्टि की है।"
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2016 की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाए जाने और 3 अप्रैल को पूरे पैनल को रद्द कर दिए जाने के बाद राज्य संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों के कुल 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल को सीबीआई द्वारा बेदाग पाए गए बर्खास्त शिक्षकों की सेवाएं 31 दिसंबर तक बढ़ा दी।