भारतीय सेना में भर्ती का पैटर्न अब बदलने जा रहा है। अगर आप इस बदलाव से वाकिफ नहीं हैं तो क्लिक करके यहां जान लीजिए, फायदा होगा।
विज्ञापन
2 of 5
भारतीय सेना
ऑनलाइन एग्जाम लिया जाएगा
दरअसल, सेना भर्ती प्रक्रिया के तहत अब पहले एग्जाम लिया जाएगा और जो इसे पास करेगा, उसे ही आगे टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। भर्ती रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ को मैनेज करने और इसकी वजह से भर्ती कार्यालयों के बढ़े कार्यभार को कम करने के लिए सेना यह नई व्यवस्था बना रही है। इसके अंतर्गत आवेदकों का पहले ऑनलाइन टेस्ट होगा, जो आवेदक उसे पास कर लेंगे उनको ही फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा।
विज्ञापन
3 of 5
indian army
नए सॉफ्टवेयर के तहत होगी परीक्षा
इस नई व्यवस्था को अमल में लाने के लिए सेना एक खास सॉफ्टवेयर तैयार कर रही है। इसी सॉफ्टवेयर के जरिये आवेदकों का पहले ऑनलाइन टेस्ट लिया जाएगा। कंप्यूटर सेंटर भर्ती कार्यालयों में स्थापित किए जाएंगे, जो सीधे सेना मुख्यालय से जुड़े होंगे। आवेदकों के बैच बनाए जाएंगे, जिन्हें सेंटर अलॉट किए जाएंगे। फिर बैच वाइज एग्जाम की तारीख और समय जय किया जाएगा। इसकी जानकारी ऑनलाइन दी जाएगी। वहीं भर्ती प्रक्रिया के दौरान लिखित परीक्षा में अपने साथ पर्स, हैंड बैग, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, किताब व पेन ले जाने पर भी पाबंदी रहेगी।
4 of 5
भारतीय सेना
पंजाब, हरियाणा में जल्दी लागू हो जाएगा
सेना भर्ती का यह पायलट प्रोजेक्ट देश में अभी बंगलूरू और राजस्थान में चल रहा है। यूपी में अगले साल से इसको लागू किया जाएगा। जल्दी ही हरियाणा, पंजाब में भी इसे लागू कर दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश में अगले साल से नए पैटर्न से सेना भर्ती होगी। आवेदकों का पहले लिखित परीक्षा होगी। इससे रिक्रूटमेंट अथॉरिटी को दो परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। एक तो अभ्यर्थियों की संख्या काफी कम हो जाएगी, दूसरे कागजात में फर्जीवाड़े पर रोकथाम लगेगी।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अपनाया जा रहा पैटर्न
सेना भर्ती कार्यालय के अधिकारी ने बताया कि अब सेना में भी विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया के पहले चरण में ही लिखित परीक्षा होगी। जो अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में पास करेंगे, उन्हें फिजिकल फिटनेस्ट टेस्ट देना होगा। इसमें 1600 मीटर दौड़, बीम, लंबी कूद, जिगजैग, लंबाई और छाती की मापतौल शामिल है। इनके बाद मेडिकल टेस्ट होगा। उन्होंने बताया कि आर्मी रिक्रूटमेंट सेल बंगलूरू व राजस्थान में पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह पैटर्न अपनाया जा रहा है।