जम्मू-कश्मीर में महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत अब तक 12 लाख लाभार्थियों को पंजीकृत किया जा चुका है। इसमें प्रत्येक परिवार को वार्षिक पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर देने के साथ लाभार्थियों को राज्य के पंजीकृत सरकारी/निजी अस्पतालों में कैशलेस चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है। इसमें दूसरे राज्यों के चिकित्सा केंद्रों में भी चिकित्सा सुविधाएं देने का प्रावधान है। योजना के तहत अधिक लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड देने में जम्मू-कश्मीर देश का दूसरा राज्य बन गया है।
रियासत में 2011 की जनगणना के आधार पर 613648 परिवारों के करीब तीस लाख लाभार्थियों को पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में एक दिसंबर से इस योजना को शुरू किया गया था। योजना के बेहतर कार्यान्वयन के लिए जिला इंप्लीमेंटेशन यूनिट (डीआईयू) में संबंधित जिला उपायुक्त चेयरमैन और डिप्टी सीएमओ नोडल आफिसर के तौर पर काम कर रहे हैं।
योजना में 1350 मेडिकल पैकेज रखे गए हैं, जिसमें सर्जरी, मेडिकल और डेकेयर ट्रीमेंट में दवाओं और चिकित्सा जांच शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर में बीमा कवर के लिए बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी से अनुबंध किया गया है।
जिला पंजीकृत लाभार्थी
जम्मू 124536
कठुआ 116365
राजोरी 82010
उधमपुर 75234
पुंछ 73493
डोडा 52421
रामबन 37576
रियासी 37051
सांबा 32707
किश्तवाड़ 25876
चिकित्सा केंद्रों में मिल रहा इलाज
रियासत में 150 के करीब सरकारी व निजी चिकित्सा केंद्रों को पंजीकृत करके लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। इसमें लाभार्थी को जिला, कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर, मेडिकल कालेजों आदि के अलावा निजी अस्पतालों में पहुंचकर गोल्डन कार्ड दिखाना होगा। जिसमें पंजीकृत लाभार्थी को कैशलेस चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।
खिदमत केंद्रों से गोल्डन कार्ड पाएं
राज्य में सोशियो-इकोनामिक कास्ट जनगणना 2011 (एसईसीसी) के तहत लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड दिए जा रहे हैं। इसमें सरकार की ओर से कामन सर्विस सेंटर (सीएससी, खिदमत केंद्र) और पंजीकृत अस्पतालों में लाभार्थी को गोल्डन कार्ड के लिए राशन रार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, टेलीफोन नंबर आदि देना होगा, जिसमें बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन के बाद संबंधित बीमा कंपनी की ओर से गोल्डन कार्ड जारी किए जाएंगे। गोल्डन कार्ड के आधार पर ही लाभार्थी को चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। लाभार्थी का डाटा वेरिफिकेशन करके अपलोड किया जाएगा। हर जिले में खिदमत केंद्र खोले गए हैं।