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घबराएं नहीं: कोरोना की दूसरी लहर से ऐसे बचें, घातक हो सकती है लापरवाही

Fri, 23 Apr 2021 06:29 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर में कोरोना की दूसरी लहर घातक होती जा रही है। नए संक्रमित मामलों के साथ मृत्युदर में भी इजाफा हो रहा है। लेकिन थोड़ी सी सावधानी और एहतियात बरतकर कोविड वायरस से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार कोविड प्रोटोकॉल का पालन करके हम खुद के साथ आसपास के लोगों को भी सुरक्षित रख सकते हैं। खासतौर पर शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को अधिक एहतियात बरतने की जरूरत है। 
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
मुख्य चिकित्सा अधिकारी जम्मू डॉ. जेपी सिंह का कहना है कि संक्रमण का प्रसार अधिकतर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से हो रहा है। ऐसे सामाजिक भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचें और गैर जरूरी सफर से परहेज करें। कोविड वायरस की वजह से रेस्पिरेटरी ट्रैक में हल्का इंफेक्शन हो जाता है जो कॉमन कोल्ड या सर्दी जुकाम में देखने को मिलता है। इस वायरस के लक्षणों में नाक बहना, सिर में तेज दर्ज, दस्त, खांसी, गला खराब, बुखार, थकान, उल्टी महसूस, सांस लेने में तकलीफ, निमोनिया ब्रोंकाइटिस की शिकायत होती है। 

 
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार दूसरी लहर के अधिक गंभीर परिणाम देखे जा रहे हैं। इसमें संक्रमण का तेजी से प्रसार हुआ है। यह वायरस मुख्य रूप से मानव से मानव के संपर्क में आने पर फैलता है, लिहाजा हमें किसी भी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में आने से बचना चाहिए। इसके लिए सुनिश्चित किया जाए कि सामूहिक गतिविधियों से दूर रहें। इसके लिए सामाजिक, धार्मिक, सामुदायिक सम्मेलन या सभा में शिरकत न करें या बहुत कम करें या स्थगित कर दें। 

 

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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
क्या करें
  • बाहर से आने पर हाथों को अच्छी तरह धोएं।
  • अपने आसपास सफाई का पूरा ध्यान रखें।
  • खांसी व छींकते समय अपने मुंह और नाक को अच्छी तरह से ढककर रखें।
  • मास्क पहनने को अनिवार्य बनाएं।
  • बुखार होने या अन्य लक्षण मिलने पर तुरंत खुद को आइसोलेट करके डॉक्टर की सलाह लें।

 
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
कोविड संक्रमित मरीज के लिए ऑक्सीजन सेचुरेशन का खास ख्याल रखने की जरूरत है। इसमें अगर आप घर पर आइसोलेट हैं, तो 4 से 6 घंटे के भीतर नियमित रूप से पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन सेचुरेशन की रीडिंग लें। इसमें ऑक्सीजन सेचुरेशन 95 से कम नहीं जानी चाहिए। अगर 95 से कम आती है तो अलर्ट हो जाएं और 90 से नीचे आ जाती है तो समझ लीजिए इमरजेंसी है। इसी तरह शारीरिक बुखार 99 डिग्री से ऊपर नहीं जाना चाहिए। अगर बुखार बढ़ रहा है तो समझिए संक्रमण का अधिक असर हुआ है। इसमें 6 घंटे के भीतर पैरासीटामोल 500 मिलीग्राम लें। 

 
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
आयुर्वेदिक अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. तरण सिंह का कहना है कि सफर या अन्य गतिविधियों के दौरान अपने साथ पोटली में जैफल, कपूर व अजबेन का मिश्रण बनाकर रखें और बार बार सूंघे। इससे कई तरह से वायरस और बैक्टीरिया से बचा जा सकता है। ठंडा शीत पेयजल और ठंडा पानी न लें। बाहर से आने पर नियमित रूप से साफ पानी से स्टीम लें, गर्म पानी में नमक डालकर घरारे करें। पौष्टिक आहार लें। पानी का नियमित सेवन करें। दिनचर्या में सैर और योग को शामिल करें।
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