नादिमर्ग नरसंहार
कश्मीर में 1989-90 में आतंकवाद चरम पर आते ही कश्मीरी पंडितों का कत्लेआम शुरू हो गया। बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित जान बचाकर घाटी से पलायन कर गए। साल 1990 में आतंकियों का डेथ वारंट जारी करने वाले एक जज, वकील, कारोबारी समेत कई पंडितों को घर से निकालकर सरेआम गोली मार दी गई। किसी की आंखों के सामने भाई को मार दिया, तो किसी की बहू-बेटी की आबरू लूट ली गई। जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने पर आतंकियों ने एक नर्स को आरे से जिंदा चीर दिया। जान से मारने की धमकी के बाद घर में चावल के ड्रम में छिपे एक पंडित को गोलियों से भून दिया। 19 जनवरी, 1990 के दिन श्रीनगर में लाखों लोगों का जुलूस निकाला गया। नारे लगे- हम क्या चाहते आजादी, कश्मीरी पंडितों भाग जाओ, औरतों को छोड़ जाओ।