मेजर सोमनाथ शर्मा भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की चौथी बटालियन की डेल्टा कंपनी के कंपनी-कमांडर थे।1947 में भारत पाकिस्तान के बीच हुए पहले संघर्ष के दौरान मेजर सोमनाथ मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में पेट्रोलिंग कंपनी में तैनात थे। इसी दौरान बडगाम में 700 पाकिस्तानी सैनिकों ने हमला कर दिया।
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1947 भारत पाक युद्ध
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पाकिस्तानी सैनिकों की इस कंपनी में 700 से अधिक सैनिक मौजूद थे। इन सभी सैनिकों के पास भारी मोर्टार और ऑटोमेटिक मशीन गन मौजूद थी।
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1947 भारत पाक युद्ध
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इन सैनिकों के मुकाबले मेजर सोमनाथ की कंपनी में बेहद कम सैनिक थे इसके बावजूद तीन तरफ से घिर गई उनकी बटालियन लगातार दुश्मन से मुकाबला करती रही।
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KASHMIR 1947
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पाकिस्तान के हमले में अपनी बटालियन के सैनिकों की जान जाते देख मेजर सोमनाथ ने खुद आगे आकर दुश्मन से मोर्चा लेना शुरू किया और अपनी बटालियन से भी दुश्मन से पूरी वीरता से लड़ने की बात कही।
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KASHMIR 1947
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मेजर सोमनाथ ने अपने सैनिकों के साथ पाकिस्तान का डंटकर मुकाबला किया और सैकड़ों की तादात में आए सैनिकों को भी मुंह की खानी पड़ी।
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इस युद्ध के दौरान पाकिस्तान की ओर से दागे गए एक मोर्टार का गोला मेजर सोमनाथ के पास आ गिरा, जिसके धमाके में वे शहीद हो गए।
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अपनी शहादत के पहले अपने साथियों से कहे अपने अंतिम शब्दों में मेजर सोमनाथ ने कहा था कि दुश्मन हमसे महज 50 मीटर की दूरी पर है और हमें उससे बची हुई अंतिम गोली और अंतिम फौजी तक मुकाबला करना ही होगा।
मेजर सोमनाथ की वीरता और युद्ध के दौरान उनके अदम्य साहस के इस कृत्य के लिए उन्हे भारत के राष्ट्रपति द्वारा मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।