सिंधु जल समझौते को लेकर दिल्ली में कल से ही बैठकों का दौर जारी है । पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने के नजरिए से जैसे ही भारत सरकार ने इस फैसले की समीक्षा करने की बात शुरू की वैसे ही सारे देश में भी इस विषय पर चर्चा शुरू हो गई । तस्वीरों में जानिए पांच दशक पुराने सिंधु जल समझौते से जुड़ी बातें-
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सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ एक द्विपक्षीय समझौता है । भारत और पाकिस्तान के बीच19 सितंबर 1960 में कराची में हुआ था ।
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इस समझौते पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे । इस समझौते के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी ।
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इस समझौते के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच 6 नदियों के पानी का बंटवारा होता है । इन नदियों मे व्यास, रावी, सतलज, झेलम, चिनाब और सिंधु नदियां शामिल है ।
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इस समझौते के अनुसार पूर्वी क्षेत्रों की नदियों ब्यास, रावी और सतलज कर नियंत्रण का अधिकार भारत को मिला जबकि पश्चिमी क्षेत्रों की नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम पर नियंत्रण के अधिकार पाकिस्तान को दिया गया ।
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पाकिस्तान में इन्हीं नदियों के पानी से बिजली निर्माण और सिंचाई के काम किए जाते हैं । वहीं भारत भी इन नदिय़ों से विद्युत निर्माण, सिंचाई औऱ जल संसाधन से जुड़ी कई योजनाओं को संचालित कर रहा है ।
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इस संधि के कारण भारत द्वारा पाकिस्तान को कुल जल का 80.52% यानी 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना दिया जाता है. जिसके कारण इसे दुनिया की सबसे उदार संधि कहा जाता है ।
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अगर इस संधि को तोड़ा जाता है तो पाकिस्तान पर बहुत बड़ा कूटनीतिक दबाव पड़ सकता है । इस समझौते के टूटने से पाकिस्तान के एक बड़े भूभाग पर रेगिस्तान बनने का खतरा मंडराने लगेगा ।
इसके साथ ही पाकिस्तान में संचालित हो रही अरबों रूपये की विद्युत परियोजनाएं भी बंद होने की कगार पर आ जाएंगी और करोड़ों लोगों को पीने का पानी भी नहीं मिल पाएगा ।