स्पाइनल स्ट्रोक, ब्रेन स्ट्रोक से अलग होता है। ब्रेन स्ट्रोक मस्तिष्क को प्रभावित करता है और मस्तिष्क की ओर रक्त का प्रवाह बंद हो जाता है। जब स्ट्रोक, स्पाइनल कार्ड को प्रभावित करता है, तो उसे स्पाइनल स्ट्रोक कहते हैं, स्पाइनल कार्ड, सेंट्रल नर्वस सिस्टम (सीएनएस) का भाग है, जिसमें मस्तिष्क भी सम्मिलित है। स्पाइनल स्ट्रोक्स, ब्रेन स्ट्रोक से कम होते हैं। ये कुल स्ट्रोक्स में से केवल दो प्रतिशत होते हैं। स्पाइनल स्ट्रोक के कारण नर्व इम्पल्स (संदेश) भेजने में परेशानी होती हैं। ये नर्व इम्पल्स, शरीर की गतिविधियों, जैसे हाथों और पैरों को हिलाना और अंगों के ठीक प्रकार से कार्य करने को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण हैं। यह बात मैक्स सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल के न्यूरो सर्जरी विभाग के असोसिएट डायरेक्टर डॉ. मनीष वैश्य ने बताई।
क्या है स्पाइनल स्ट्रोक
जब स्पाइल कार्ड की ओर रक्त का प्रवाह बाधित होता है तो उसे स्पाइनल स्ट्रोक कहते हैं। इसके ठीक प्रकार से काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में रक्त का सप्लाय होना जरूरी है। जब रक्त का प्रवाह कट ऑफ हो जाता है, स्पाइनल कार्ड को ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते है, जिससे उतकों को नुकसान पहुंचता है और वो क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। इसके कारण स्पाइनल कार्ड से गुजरने वाले संदेश (नर्व इम्पल्स) ब्लॉक हो सकते हैं। अधिकतर स्पाइनल स्ट्रोक रक्त के प्रवाह में ब्लॉकेज़ (आमतौर पर ब्लड क्लॉट्स) के द्वारा होता है। इसे इसचैमिक स्पाइनल स्ट्रोक्स कहते हैं। कुछ स्पाइनल स्ट्रोक्स ब्लीडिंग के कारण होते हैं, जिसे हैमरेज स्पाइनल स्ट्रोक्स कहते हैं।
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SPINE
स्पाइनल स्ट्रोक्स के लक्षण
स्पाइनल स्ट्रोक्स के लक्षण इसपर निर्भर करते हैं कि स्पाइनल कार्ड का कौन सा भाग प्रभावित हुआ है और स्पाइनल कार्ड को कितनी क्षति पहुंची है। अधिकतर मामलों में लक्षण अचानक दिखाई देते हैं, लेकिन कईं मामलों में ये लक्षण स्ट्रोक आने के कईं घंटों बाद भी दिखाई दे सकते हैं। लक्षणों में सम्मिलित है:
-अचानक और गंभीर गर्दन या कमर दर्द।
-पैरों की मांसपेशियां कमजोर हो जाना।
-बॉउल और ब्लैडर को नियंत्रित करने में परेशानी होना।
-मांसपेशियों में ऐंठन।
-सुन्नपन।
-हाथों और पैरों में झुनझुनी महसूस होना।
-लकवा मार जाना।
-गर्म या ठंडा न महसूस कर पाना।
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blood pressure
स्पाइनल स्ट्रोक के कारण
स्पाइन को रक्त की आपूर्ति में रूकावट के कारण स्पाइनल स्ट्रोक आता है। अधिकतर समय, यह धमनियों के संकरा होने के परिणामस्वरूप होता है जो स्पाइनल कार्ड को रक्त की आपूर्ति करते हैं। धमनियां निम्न कारणों से संकरी या कमजोर हो जाती हैं:
-उच्च रक्तदाब।
-कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर।
-हृदय रोग।
-डायबिटीज।
-जो लोग धुम्रपान करते हैं, शराब का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, नियमित रूप से एक्सरसाइज नहीं करते हैं, उन्हें भी इसका अधिक खतरा होता है।
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SPINE
इन स्थितियों के कारण भी स्पाइनल स्ट्रोक हो सकता है।
-स्पाइन में ट्यूमर हो जाना।
-स्पाइन में चोट लग जाना।
-स्पाइनल कार्ड दब जाना।
-पेट या हृदय की सर्जरी
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back pain
स्पाइनल स्ट्रोक के कारण होने वाली जटिलताएं
स्पाइनल स्ट्रोक के कारण होने वाली जटिलताएं इसपर निर्भर करती हैं कि मस्तिष्क का कौनसा भाग प्रभावित हुआ है। उदाहरण के लिए, अगर स्पाइनल कार्ड के आगे के भाग को रक्त की आपूर्ति कम हुई है, तो आपके पैर स्थायी रूप से लकवाग्रस्त हो जाएंगे। दूसरी जटिलताओं में सम्मिलित हैं:
-सांस लेने में कठिनाई होना
-स्थायी रूप से लकवाग्रस्त हो जाना
-बॉउल और ब्लैडर पर नियंत्रण न रहना
-शारीरिक संबंध बनाने में परेशानी होना
-मांसपेशियों में कमजोरी आना और उनका लचीलापन प्रभावित होना
-अवसाद
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आस्टियोपोरोसिस की बीमारी
डायग्नोसिस
ऑस्टियोपोरोसिस, कशेरूकाओं के फ्रैक्चर, डिस्क की खराबी और कैंसर युक्त ट्यूमर, जो स्पाइनल स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं का जल्दी डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट स्पाइनल कार्ड को स्थायी क्षति को रोकने और स्पाइनल स्ट्रोक के खतरे को कम करने में सहायता करता हैं।
उपचार
स्पाइल स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है और इसके लिए तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत है। दवाईयां जैसे कार्टिकोस्टेरॉइड सूजन को कम करती हैं। अगर चोट का कारण स्पाइनल कार्ड पर दबाव बढ़ रहा है, तो इस दबाव को सर्जरी के द्वारा दूर किया जाता है। अगर उचित समय पर सर्जरी करा ली जाए तो स्पाइनल कार्ड को क्षतिग्रस्त होने से बचा सकते हैं। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (एमईएस) तकनीक ने सर्जरी को बहुत आसान बना दिया है। इसमें छोटे-छोटे कट लगाए जाते हैं और सामान्यता आधे घंटे से भी कम समय लगता है। इस प्रकार की सर्जरी में पारंपरिक सर्जरी की तुलना में परेशानियां कम होती हैं और अस्पताल में ज्यादा रहने की जरूरत नहीं होती है।
इसलिए जरूरी है सर्जरी:
-स्पाइनल कार्ड को स्थायी नुकसान पहुंचाने से बचाने के लिए स्पाइनल स्ट्रोक के लिए सर्जरी की जाती है।
- ब्लड क्लॉट को निकालने के लिए।
- स्पाइल ट्यूमर को निकालने के लिए, जो स्पाइल कार्ड को दबाता है और स्पाइनल कार्ड की ओर रक्त के प्रवाह में रूकावट डालता है।
- कशेरूकाओं को रि-अलाइन करने के लिए।
- टूटी हुई कशेरूकाओं को जोड़ने के लिए।
-डिस्क के टुकड़े, हड्डियों के टुकड़े और किसी बाहरी वस्तुओं को निकालने के लिए।
-सर्जरी के पश्चात बेड रेस्ट की जरूरत पड़ती है, ताकि स्पाइनल कार्ड की हड्डी ठीक प्रकार से हील हो जाए।