फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फौजी बनकर दुश्मन को सबक सिखाने को बेताब हैं शहीदों के बेटे

Wed, 21 Sep 2016 12:59 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
विज्ञापन
1 of 8
वंश और सुधांशीष - फोटो : PTI
उड़ी हमले में शहीद हुए 10 डोगरा रेजीमेंट के हवलदार रवि पाल सलोत्रा सारबा रामगढ़ जिला सांबा के सपूत थे। रवि के दो बेटे हैं। बड़ा वंश दस साल का है और छोटा बेटा सुधांशीष उर्फ काका सात साल का। 
विज्ञापन

2 of 8
वंश और सुधांशीष - फोटो : PTI
सोमवार को जम्मू के दो शहीदों को उनके गांव में अंतिम विदाई देते वक्त हर आंख नम थी, हर दिल में गुस्सा था, लेकिन शहीदों के बेटे पिता का बदला लेने के लिए फौज में भर्ती होने की ठान रहे थे। 
विज्ञापन

3 of 8
रवि पाल का पार्थिव शरीर - फोटो : PTI
वंश ने कहा उनका सपना था कि मैं फौज में डाक्टर बनूं। मैं उनका सपना पूरा कर देश की सेवा करूंगा और अपने पिता की मौत का बदला भी लूंगा। शहीद की अंतिम यात्रा में मौजूद हर शख्स इस बहादुर बेटे को सलाम कर रहा था।

4 of 8
शहीद रवि पॉल - फोटो : Amar Ujala
यही ज़ज्बा बिश्नाह के शिबूचक के शहीद सूबेदार करनैल सिंह के बेटों में है। करनैल के तीन बेटे हैं। बड़ा अनमोल सैनी स्नातक प्रथम वर्ष में पढ़ रहा है। अनमोल बेहद गम और गुस्से में है। वह चाहता कि पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहिए ताकि मेरी तरह कोई और बेटा अपने बाप को न खोए। सबसे छोटा शिव दूसरी कक्षा में पढ़ता है। 
 
विज्ञापन

5 of 8
शहीद रवि पॉल को श्रद्धांजलि - फोटो : Amar Ujala
सूबेदार करनैल सिंह के मझले बेटे अरुण की तमन्ना भारतीय सेना में भर्ती होकर पाकिस्तान को सबक सिखाने की है। अरुण 11वीं का छात्र है। उसे अपने पिता पर गर्व है। वह भी उन्हीं की तरह देश की सेवा करना चाहता है। 
विज्ञापन

6 of 8
रवि पाल का पार्थिव शरीर - फोटो : PTI
शहीदों के परिवारों में जो दर्द पसरा है उसका कोई ओर-छोर नहीं है। बड़ी बात यह है कि दर्द के इस सैलाब में भी उनकी आने वाली पीढ़ी वतन की हिफ़ाजत के लिए सरहद पर तैनात होने को बेताब है। इस ज़ज्बे को दुश्मन का कोई भी हथियार पस्त नहीं कर सकता।
विज्ञापन

7 of 8
रवि पाल - फोटो : ANI
एक बार फिर साबित हुआ कि वतन पर कुर्बान होने वाले शहीदों के परिवार में मातम तो आता है पर उनका जोश और जज्बा पहले से भी अधिक मजबूत हो जाता है। 
विज्ञापन

8 of 8
रवि पाल - फोटो : Amar Ujala
जम्मू के दो शहीदों को उनके गांव में अंतिम विदाई देते वक्त हर आंख नम थी, हर दिल में गुस्सा था, लेकिन शहीदों के बेटे पिता का बदला लेने के लिए फौज में भर्ती होने की ठान रहे थे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें