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जम्मू-कश्मीर: केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे के चलते छावनी में तब्दील हुई श्रीनगर की डल झील

Wed, 26 Jun 2019 08:10 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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श्रीनगर में गृहमंत्री के दौरे के चलते बढ़ी सुरक्षा - फोटो : बासित जरगर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कश्मीर के दो दिवसीय दौरे को लेकर सुरक्षाबलों ने पूरी घाटी को छावनी में तब्दील कर दिया है। विशेष रूप से डल झील और आस पास के इलाकों में कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। 
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श्रीनगर में गृहमंत्री के दौरे के चलते बढ़ी सुरक्षा - फोटो : बासित जरगर
गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर बुधवार को यहां पहुंचे। गृह मंत्री के रूप में शाह का राज्य में यह पहला दौरा है। बुधवार को दोपहर करीब 3.30 बजे बीएसएफ के विशेष विमान से वह श्रीनगर के टेक्निकल एयरपोर्ट पर उतरे। जहां सरकार, पुलिस, सेना व अन्य सुरक्षा एजंसियों और प्रशासनिक ने उनका स्वागत किया। वह वहां से हेलीकाप्टर के जरिये सीधे राज भवन चले गए। 
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श्रीनगर में गृहमंत्री के दौरे के चलते बढ़ी सुरक्षा - फोटो : बासित जरगर
एक अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्री के घाटी के दौरे को देख सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने बताया कि श्रीनगर में दाखिल होने वाले सभी मार्गों पर चेक प्वाइंट स्थापित किए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि गृह मंत्री के लगभग सभी कार्यक्रम डल झील के किनारे पर स्थित एसकेआईसीसी और चश्मा शाही में ही हैं, इसलिए डल झील और उसके आस पास के इलाकों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। 

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श्रीनगर में गृहमंत्री के दौरे के चलते बढ़ी सुरक्षा - फोटो : बासित जरगर
बता दें कि, डल झील में विशेष सुरक्षा दस्ते तैनात किए गए हैं जिनमें शार्प शूटर भी है। वो लगातार मोटर बोट्स में गश्त कर रहे हैं। साथ ही डल  झील की ओर जाने वाले सभी रास्ते सील कर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है। इसके अलावा श्रीनगर शहर के संवेदनशील इलाकों में भी जवानों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। 
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श्रीनगर में गृहमंत्री के दौरे के चलते बढ़ी सुरक्षा - फोटो : बासित जरगर
अलगाववादी बैक फुट पर
गौरतलब है कि इस बीच अलगाववादियों की ओर से भी कुछ नरम रुख सामने आया है। किसी केंद्रीय मंत्री के घाटी दौरे के दौरान अक्सर अलगाववादी कश्मीर बंद का आह्वान करते थे, परंतु इस बार ऐसी कोई काल नहीं दी गई। ऐसा माना जा रहा है कि हुर्रियत और केंद्र के बीच बातचीत का मुद्दा गरमाने के बाद अलगाववादी भी कुछ हद तक बैकफुट पर हैं। 
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