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सेना की मदद से फिर खुले घाटी के स्कूल, बच गया 14 लाख बच्चों का भविष्य

Mon, 26 Sep 2016 12:40 AM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
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स्कूल जाते बच्चे - फोटो : File Photo
पिछले ढाई महीने से हिंसा के चलते बंद पड़े घाटी के स्कूलों को सेना ने खुलवाना शुरू कर दिया है। अमन बहाली के मिशन पर जुटी सेना ने अवाम के बीच जाकर बुनियादी जरूरतों को समझने और पूरा करने की कवायद के तहत उत्तरी कश्मीर में बंद पड़े स्कूल को खुलवाया। देखें तस्वीरें- 
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खुले घाटी के स्कूल - फोटो : File Photo
बाकायदा कक्षाएं शुरू हो गईं और बच्चों ने सामान्य दिनों जैसी पढ़ाई भी की। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में मालनगाम सरकारी मिडिल स्कूल खुलवाने के लिए सेना ने स्थानीय लोगों और प्रशासन से सहयोग लिया। 
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स्कूल जाते बच्चे - फोटो : File Photo
महीनों बाद खुले स्कूल में पहुंचे विद्यार्थियाें और स्टाफ सदस्यों ने उम्मीद जताई कि छूटी पढ़ाई को समय से पूरा किया जाएगा। इसके लिए विशेष प्रयास करने का संकल्प भी लिया गया।
 

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स्कूल जाते बच्चे - फोटो : File Photo
इसी तरह से दक्षिणी कश्मीर के पनाड, संगनाद, कचनार, गलान एशधार और खीरम में सेना ने निशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किए। बड़ी तादाद में पहुंचे लोगों ने शिविर की सुविधा का लाभ उठाया। बूना द्योसर सहित आसपास के इलाकों में सेना ने स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों से संवाद कर सेब के ट्रक निकालने की व्यवस्था कर दी।
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स्कूल जाते बच्चे - फोटो : File Photo
सेब के ट्रक कश्मीर से बाहर नहीं आ पा रहे थे। सेना अब अपनी निगरानी में सेब के ट्रकों को घाटी से बाहर भिजवा रही है। सेब की फसल तैयार होने के बाद चौपट होने की कगार पर पहुंच चुकी है। इसे लेकर सेब उत्पादक कई दफा प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं।
 
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kashmir protest - फोटो : PTI
उल्लेखनीय है कि दक्षिण कश्मीर से शुरू हुई हिंसा घाटी के अन्य इलाकाें में फैलने से सरकारी दफ्तर और शिक्षा संस्थानों की रूटीन पर व्यापक असर पड़ा। हिंसक वारदातों की वजह से घाटी के अधिकांश स्कूल लगातार बंद हैं। 
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फाइल फोटो - फोटो : File Photo
स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 14 लाख बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। राज्यपाल एनएन वोहरा और शिक्षा मंत्री नईम अख्तर खुद कह चुके हैं कि हिंसा की सबसे बड़ी मार शिक्षा पर पड़ी है। स्कूल खुलवाने के लिए कई मर्तबा उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। 
 
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