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Sarthal Devi Yatra: माता काली के जयकारों से गूंजा किश्तवाड़, जानिए इसे क्यों कहते हैं सरकारी यात्रा?

Mon, 29 Jun 2020 11:15 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सरथल देवी यात्रा - फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में अष्टादश भुजा स्वरूप माता काली की वार्षिक यात्रा का आयोजन किया गया। सरकूट गौरी शंकर मंदिर में पूर्णाहुति के बाद माता की शोभायात्रा निकाली गई और बाद में छड़ी यात्रा जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर मां के दरबार सरथल के लिए रवाना हुई। इस दौरान मां के जयकारों से पूरा किश्तवाड़ नगर गूंज उठा। इस यात्रा को सरकारी यात्रा के नाम से भी जाना जाता है। यात्रा का आयोजन सरथल देवी ट्रस्ट के चेयरमैन विक्रमादित्य सिंह के नेतृत्व में किया गया। 

 
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सरथल देवी यात्रा - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की ओर से यात्रा में शामिल होने के लिए करीब 20 लोगों को अनुमति मिली है। वहीं, कोरोना महामारी के चलते सामाजिक दूरी का भी ध्यान रखा गया।

 
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सरथल देवी यात्रा - फोटो : अमर उजाला
अष्टादश भुजा स्वरूप माता काली की वार्षिक यात्रा का इतिहास डोगरा शासन काल से ही जुड़ा है। यह यात्रा हर साल 28 जून को सरथल के लिए रवाना होती है। पहले दिन छड़ी किश्तवाड़ से प्रस्थान कर दूसरे दिन (आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवमी को) हवन में पूर्णाहुति के साथ संपन्न होती है। 

 

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सरथल देवी यात्रा - फोटो : अमर उजाला
यात्रा का आयोजन पहले राजा द्वारा किया जाता था, जिस कारण इसे सरकारी यात्रा के नाम से जाना जाता है। मौजूदा समय में यात्रा का आयोजन सरथल देवी ट्रस्ट करता है।
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सरथल देवी यात्रा - फोटो : अमर उजाला
यहां विराजमान माता भगवती को समस्त किश्तवाड़ और डोडा जिला के लोग कुलदेवी मानते हैं।
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