पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए हैं। हमले की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हमले में 300 किलो आरडीएक्स का इस्तेमाल होने की बात सामने आ रही थी, लेकिन शुरुआती जांच बताती है कि हमले में आरडीएक्स का इस्तेमाल नहीं हुआ। आगे की स्लाइड में जानिए, आरडीएक्स नहीं तो क्या हो सकता है विस्फोटक?
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जम्मू श्रीनगर हाईवे पर हमला
- फोटो : अमर उजाला
सूत्र बताते हैं कि शुरुआती जांच में सामने आया कि हमले में आरडीएक्स नहीं, सोडियम अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ। ये भी बताया जा रहा है कि हमले को अंजाम देने वाले आतंकी ने अगर कार में लगभग 300 किलो से अधिक आरडीएक्स रखा होता तो इतने आरडीएक्स के धमाके एक ट्रक करीब 40 मीटर तक हवा में उछल सकता है।
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यही नहीं, अगर वाहनों के बीच कहीं सेंटर में इतना विस्फोटक पदार्थ होता तो 7 से 8 वाहनों के चीथड़े उड़ा सकता था। आशंका है कि आतंकी आदिल की कुछ ऐसी ही प्लानिंग थी। ऐसे धमाका करने के मुख्य रूप से दो ही तरीके हैं। पहला यह कि विस्फोटक लगीं आईईडी को कहीं पर लगाकर रखा जाए और रिमोट से विस्फोट कर दिया। दूसरा यह की इसके लिए तारें बिछाई जाएं। कुछ दूरी पर इसका बटन दबाकर विस्फोट किया जाए। पुलवामा में हुए हमले में इन दोनों का ही इस्तेमाल नहीं किया।
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आतंकियों को पता था कि तारें बिछाने से काम नहीं चलेगा। क्योंकि किसी भी कानवाय के गुजरने से पहले उसके रूट पर गश्त होती है, जिससे तारें बिछाने वाला प्लान संभव नहीं था। रिमोट से भी हमला नहीं किया गया, क्योंकि सड़क पर खड़े वाहन को आगे चल रहे वाहन मानीटर कर लेते हैं। इसलिए आतंकी पीछे से कार लेकर आया और सीधा काफिले के एक वाहन से जाकर टकराया। कार चलाने वाले ने आईईडी बटन दबाकर विस्फोट किया, क्योंकि इसमें विस्फोटक भरा था, इसलिए जिस गाड़ी से यह टकराया। उसके चीथड़े उड़ गए।
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अमरोहा और महोबा में भी बरामद हुआ है विस्फोटक
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बीते दिनों अमरोहा में भी एनआईए की टीम ने आईएसआईएस और हथियार सप्लायरों के गठजोड़ का नेटवर्क तोड़ने के लिए लगातार छापेमारी की थी। इस दौरान आईएसआईएस से जुड़े कथित नईम व अमरोहा के सुहेल द्वारा बताए हथियार सप्लायरों की तलाश में एनआईए कई जगहों पर दबिश दी। अमरोहा में पहले पड़े छापे में एजेंसी ने बताया था कि उसने स्थानीय रूप से बनाए रॉकेट लॉन्चर, आत्मघाती बेल्टों के सामान और टाइमर के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले 112 अलार्म क्लाक बरामद किए थे।
इसके अलावा 25 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री पोटेशियम नाइट्रेट, अमोनियम नाइट्रेट और सल्फर बरामद किया गया। समूह ने रिमोट संचालित आईईडी बनाने के लिए कथित तौर पर रिमोट से संचालित कारें और वायरलेस डोरबेल खरीदी थीं। हाल ही में यूपी के महोबा जिले में पिकअप से 50 बोरी अमोनियम नाइट्रेट बरामद की गई। आरोपी विस्फोटक के विषय में कोई कागजात नहीं दिखा सके।