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जानें, हर 6 महीनें में कैसे बदल जाती है जम्मू-कश्मीर की राजधानी?

Tue, 08 Nov 2016 12:47 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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darbar move - फोटो : Amar Ujala
जम्मू कश्मीर में एक बार फिर सरकार के सारे कामकाजों के लिए जम्मू सचिवालय को खोल दिया गया है। सरकार की दरबार मूव की परंपरा के तहत अब सारे सरकारी विभागों के मुख्यालय और सचिवालय को अगले 6 महीनों के लिए जम्मू से संचालित किया जाएगा। जानें कैसे हर 6 महीनें में कैसे बदल जाती है जम्मू-कश्मीर की राजधानी?
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darbar move - फोटो : Amar Ujala
सालों से चली आ रही इस परंपरा के लिए हर बार करोड़ो रूपए खर्च होते हैं। दरअसल दरबार मूव की परंपरा 1872 में डोगरा रियासत के राजा रणबीर सिंह द्वारा शुरू की गई थी।
 
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darbar move - फोटो : Amar Ujala
दरबार मूव की परंपरा के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के सभी सरकारी दफ्तरों, सचिवालय और राजभवन के कार्यालय को जम्मू में शिफ्ट किया जाता है। दरअसल जम्मू-कश्मीर में दो राजधानी क्षेत्रों की व्यवस्था है। 
 

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बैठक में मौजूद मुख्यमंत्री व अन्य। - फोटो : Amar Ujala
साल के मई महीने से अक्टूबर महीने तक सरकारी कामकाज की राजधानी श्रीनगर होती है जबकि नवंबर से अप्रैल तक सारे सरकारी कामकाज जम्मू के सचिवालय और सरकारी दफ्तरों में होते हैं। 
 
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darbar move - फोटो : Amar Ujala
इस परंपरा के अंतर्गत हर साल दोनों राजधानियों के बीच दरबार मूव होता है जिसके तहत सभी राजकीय कार्यालयों को जम्मू और श्रीनगर के बीच स्थानांतरित किया जाता है। 
 
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सच‌िवालय के बाहर खड़े श्रीनगर सामान लेकर जाने वाले ट्रक - फोटो : Amar Ujala
दरबार मूव के दौरान राजधानियों से सरकारी दस्तावेजों को इकठ्ठा करके ट्रकों से दूसरे सचिवालय तक पहुंचाया जाता है। इस दौरान जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये जाते हैं। 
 
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दरबार मूव के कर्मचा‌र‌ियों को लेकर जती बस - फोटो : Amar Ujala
जम्मू में दरबार मूव के दौरान सरकार के मुलाजिमों को जम्मू लाया जाता है जबकि श्रीनगर के राजधानी बनने पर कर्मचारियों को श्रीनगर ले जाया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत सरकार द्वारा इन राजधानी क्षेत्रों में कई होटलों और सरकारी गेस्ट हाउसों में मुलाजिमों के रहने की व्यवस्था की जाती है। 
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darbar move - फोटो : Amar Ujala
दरबार मूव की इस ऐतिहासिक परंपरा पर भले ही हर साल करोड़ों रूपए खर्च होते हों लेकिन ये परंपरा अपने आप में एक बेहद खास सरकारी व्यवस्था जरूर कही जा सकती है। 
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